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Budget 2023: रेल-रैपिड व मेट्रो से जुड़ेगा NCR का अंतिम छोर, एक साथ लाए जाएंगे सभी साधन, जानें क्या है प्लान

Wed, 01 Feb 2023 09:51 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

केंद्रीय बजट में इस बार दिल्ली-एनसीआर के यात्रियों को बेहतर सुविधा के लिए रेलवे लास्ट माइल कनेक्टिविटी पर जोर दिया गया है। केंद्रीय बजट में पहली बार इस बात का प्रावधान है कि रेलवे स्टेशनों को मेट्रो स्टेशन से जोड़ा जाए।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : istock
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विस्तार
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दिल्ली-एनसीआर की आवाजाही बेहतर करने की दिशा में केंद्रीय बजट से आस बंधी है। योजना रेल, रैपिड रेल, मेट्रो समेत सार्वजनिक परिवहन के सभी साधनों को एक तल पर लाने की है। इसमें परिवहन के एक माध्यम से दूसरे माध्यम को जोड़ा जाएगा। फिलहाल जोर रेलवे स्टेशनों को नजदीकी मेट्रो स्टशेनों से जोड़ने पर है। इसके लिए बजट में 500 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव है। दिलचस्प यह कि इस योजना से दिल्ली रिंग रेल के स्टेशनों को भी नया जीवन मिलेगा। संपर्क बेहतर होने से मुसाफिरों का इन स्टेशनों पर दबाव बढ़ेगा।

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केंद्रीय बजट में इस बार दिल्ली-एनसीआर के यात्रियों को बेहतर सुविधा के लिए रेलवे लास्ट माइल कनेक्टिविटी पर जोर दिया गया है। केंद्रीय बजट में पहली बार इस बात का प्रावधान है कि रेलवे स्टेशनों को मेट्रो स्टेशन से जोड़ा जाए। इसके तहत अगर मेट्रो स्टेशन से रेलवे स्टेशन की दूरी अधिक है तो उसे स्वचालित ट्रेवलेटर, रोड ओवरब्रिज, रोड अंडरब्रिज, पैदल पार पथ समेत हर संभव तरीके निकाले जाएंगे। इससे रेलवे व मेट्रो के बीच की आवाजाही बेहतर होगी।

अधिकारी बताते हैं कि रेलवे का 500 करोड़ रुपये के बजटीय आवंटन से मल्टीमॉडल हब से जुड़ी योजना में रेलवे की भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है। अभी शुरुआत मेट्रो स्टेशन से होगी। आगे योजना के पूरी तरह मूर्त रूप लेने पर रेलवे, मेट्रो व आरआरटीएस कॉरिडोर के स्टेशन, एयरपोर्ट, बस व ऑटो स्टैंड आपस में जोड़े जाएंगे। इससे एक परिवहन के एक माध्यम से दूसरे माध्यम तक पहुंचना मुसाफिरों के लिए आसान होगा। सार्वजनिक परिवहन बेहतर होने से वह बेहद जरूरी होने पर अपने निजी वाहन का इस्तेमाल करेंगे।

नहीं रुकेगी रैपिड रेल, मिले 3,596 करोड़
दिल्ली-एनसीआर की आवाजाही बेहतर करने वाली रैपिड रेल की चाल भी नहीं थमेगी। 2023-24 के बजट में रैपिड रेल पर 3,596 करोड़ रुपये खर्च का प्रस्ताव है। इसका बड़ा हिस्सा दिल्ली-मेरठ कारीडोर पर खर्च होगा। साहिबाबाद-दुहाई के बीच का इसका पहला सेक्शन मई 2023 तक शुरू हो जाएगा। वहीं, दुहाई-मेरठ के बीच का दूसरा हिस्सा नए साल पर चालू होगा जबकि दिल्ली-साहिबाबाद के हिस्से पर रैपिड रेल 2025 तक दौड़ने लगेगी। नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (एनसीआरटीसी) के वरिष्ठ अधिकारी मानते हैं कि इस बार का बजट आवंटन दिल्ली-मेरठ के बीच निर्माणाधीन आरआरटीएस कॉरिडोर की जरूरतों की पूरा करेगा।

एनसीआरटीसी की प्राथमिकता में भी अभी यही कॉरिडोर है। वहीं, दिल्ली-गुरुग्राम-एनएनबी कॉरिडोर पर सेवाओं की शिफ्ट का काम चल रहा है। दिल्ली, हरियाणा व राजस्थान की राज्य सरकार ने इसके डीपीआर को मंजूरी दे दी है। फिलहाल, इसका प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास है। मंजूरी मिलने के बाद करीब 107 किमी लंबे कॉरिडोर के जमीनी स्तर पर काम शुरू होगा। वहीं, दिल्ली-पानीपत कॉरिडोर के लिए दिल्ली सरकार की मंजूरी का इंतजार है।

180 किमी प्रति घंटे की रफ्तार के लिए डिजाइन
आरआरटीएस ट्रैक को 180 किमी प्रति घंटे की रफ्तार के लिए डिजाइन किया गया है, जबकि इस पर चलने वाली रैपिड रेल की चाल 160 किमी प्रति घंटे होगी। देश में अपनी तरह की पहली परियोजना के तहत दिल्ली-एनसीआर में तीन ट्रैक बनने हैं। इसमें से दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर के एक हिस्से पर इसी साल रैपिड ट्रेन उतार दी जाएगी।

आरआरटीएस के तीन कॉरिडोर
  • देश के पहले 82 किमी लंबे आरआरटीएस कॉरिडोर यानी दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। इस कॉरिडोर पर दो डिपो और एक स्टेबलिंग यार्ड समेत 25 स्टेशन निर्माणाधीन हैं।
  • इस कॉरिडोर पर 14,000 से अधिक मजदूर और 1100 इंजीनियर दिन-रात काम कर रहे हैं। कॉरिडोर के लिए अब तक 35 फीसदी सुरंग के अलावा 65 फीसदी एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण कार्य पूरा हो गया है।
  • करीब 107 किमी लंबे दिल्ली-गुरुग्राम-एसएनबी कॉरिडोर पर बिजली, पानी, सीवर जैसी सेवाओं को शिफ्ट करने का काम चल रहा है।
  • 103.02 किमी लंबे दिल्ली-पानीपत कॉरिडोर पर अभी दिल्ली सरकार की इजाजत मिलने का एनसीआरटीसी को इंतजार है।
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फेज-4 मेट्रो को मिली बजट की बूस्टर डोज

दिल्ली मेट्रो के फेज-4 को बजट की बूस्टर डोज से नई रफ्तार मिलेगी। चौथे चरण के तीनों कॉरिडोर पर नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (एनसीएमसी), चालकरहित मेट्रो परिचालन, 312 मेट्रो कोच, 10 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन के अलावा सिग्नलिंग प्रणाली को भी दुरुस्त किया जाएगा। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) के फेज-4 के तीन प्राथमिक कॉरिडोर पर करीब 65 किलोमीटर के दायरे में मेट्रो निर्माण का तेजी से चल रहा है। सभी स्टेशनों पर पहले दिन से ही एनसीएमसी की सुविधा मुहैया होगी, जबकि नई तकनीक पर आधारित चालकरहित मेट्रो भी कॉरिडोर की अलग पहचान होगी। मेट्रो नेटवर्क के विस्तार के लिहाज से मेट्रो के 312 कोच खरीदें जाएंगे। फेज-4 में 10 मेगावाट साैर ऊर्जा उत्पादन के साथ ही सिंग्नलिंग प्रणाली में भी तकनीकी बदलाव किए जा रहे हैं। खास बात यह है कि दिल्ली मेट्रो की इन परियोजनाओं के ज्यादातर कार्यों में अपनाई जा रही तकनीक और नई संपत्तियों की खरीद में भी आत्मनिर्भर भारत को खास तवज्जो जा रही है। सिग्नलिंग प्रणाली हो या कोच, इनमें अधिकतर आत्मनिर्भरता की तरफ मेट्रो के कदम लगातार बढ़ रहे हैं। हाल के वर्षों में डीएमआरसी के बजाय देशभर में सभी मेट्रो परियोजनाओं के लिए बजट प्रदान किया जा रहा है। 
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