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पत्नी के अवैध संबंध से परेशान दलाल ने कर दिया दिल्ली में किडनी रैकेट का भंडाफोड़

Sat, 04 Jun 2016 01:54 PM IST
पुरुषोत्तम वर्मा/अमर उजाला, नई दिल्ली
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किडनी रैकेट - फोटो : अमर उजाला
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गिरफ्तार दलाल देवाशीष मौलिक को यह शक नहीं होता कि उसकी पत्नी के दूसरे दलाल से अवैध संबंध बन गए हैं, तो शायद इस किडनी रैकेट का पर्दाफाश नहीं होता। देवाशीष भी किडनी देने दिल्ली आया था, लेकिन उसकी किडनियां छोटी-बड़ी होने के कारण वह दे नहीं पाया था। इसके बाद उसकी पत्नी मोमिता को पश्चिमी बंगाल से दिल्ली लाया गया।
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असीम सिकंदर दोनों को दिल्ली लेकर आया था। मोमिता ने पुष्पेंद्र कोठाधर को किडनी 25 लाख रुपये में दे दी। इसके बाद असीम ने देवाशीष को 50 हजार रुपये देकर पश्चिमी बंगाल वापस यह कहकर भेज दिया था कि पत्नी की तबीयत ठीक होने पर वह वापस भेज देगा।

कुछ दिनों बाद जब देवाशीष ने पश्चिम बंगाल से दिल्ली असीम के पास फोन किया, तो असीम ने उसकी पत्नी से बात कराई। कुछ दिनों बाद जब पत्नी से बात हुई, तो पत्नी ने पश्चिम बंगाल उसके पास आने से मना कर दिया।
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दूसरे दलाल और पत्नी के बीच था अवैध संबंधों का शक

किड़नी रैकेट - फोटो : अमर उजाला
देवाशीष मोमिता को ठीक से नहीं रखता था। ऐसे में देवाशीष को लगा कि उसकी पत्नी के असीम से संबंध बन गए हैं और असीम उसकी पत्नी को छीन लेगा। इसके बाद वह दिल्ली आया और सीधे अपोलो अस्पताल गया।

यहां अस्पताल के कर्मचारी आदित्य और शैलेष सक्सेना ने उसे पत्नी से नहीं मिलवाया और असीम व अन्य लोगों को देवाशीष के दिल्ली आने की जानकारी दे दी। जब देवाशीष पत्नी से नहीं मिल पाया, तो वह सीधे सरिता विहार थाने पहुंच गया और किडनी रैकेट के बारे में पूरी जानकारी दी। इसके बाद पुलिस ने कानूनी जानकारों से राय लेकर रैकेट का भंडाफोड़ किया।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार राजकुमार इस गिरोह का मास्टर माइंड है। जालंधर और कोयंबटूर के किडनी रैकेट में भी यह शामिल था। दिल्ली पुलिस ने पंजाब और कोयंबटूर पुलिस से संपर्क साधा है। 
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विज्ञापन देकर ढूंढते थे डोनर और यहां तैयार होते थे कागज

किड़नी रैकेट - फोटो : अमर उजाला
पुलिस के अनुसार किडनी देने वालों से संपर्क साधने के लिए आरोपी आनंद बाजार पत्रिका में विज्ञापन देते थे। किसी के संपर्क साधते ही आरोपी उसे पैसे का लालच देकर किडनी देने के लिए तैयार कर लेते थे। आरोपी असीम और सत्यप्रकाश भी अपनी किडनी बेच चुके हैं।

सिलीगुड़ी में तैयार होते थे फर्जी कागजात
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी किडनी डोनर और प्राप्तकर्ता के फर्जी कागजात सिलीगुड़ी में तैयार करवाते थे। ये डोनर और प्राप्तकर्ता के ओरिजिनल कागजात लेकर सिलीगुड़ी भेजते थे। वहां डोनर और प्राप्तकर्ता के ओरिजिनल कागजात पर फोटो और पता बदल दिया जाता था। ऐसे में कागजात के नंबर वही होते थे। इसके बाद वहां से मेल के जरिए कागजात दिल्ली आ जाते थे। 

दिल्ली में प्रिंट लेकर लेमिनेशन कराकर अपोलो अस्पताल में जमा करा देते थे। अस्पताल प्रशासन जब आधार कार्ड आदि की जांच करता था, तो उन कागजात के नंबर सही मिलते थे। इसके बाद अस्पताल की ऑथराइजेशन कमेटी किडनी ट्रांसप्लांट के लिए अनुमति दे देती थी। आरोपियों के कब्जे से दो लाख रुपये, फर्जी आईडी प्रूफ और इलेक्ट्रॉनिक सामान बरामद किए गए हैं।
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