भारत मंडपम में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का असर राजधानी के होटलों पर भी दिखाई दे रहा है। विदेशी प्रतिनिधिमंडलों की आमद से सेंट्रल दिल्ली के प्रीमियम होटलों में कमरों की मांग बढ़ गई है। 12 और 13 सितंबर के लिए सेंट्रल दिल्ली के 12 से 15 बड़े होटलों में करीब 3,000 से 3,500 कमरे प्रतिनिधिमंडलों के लिए बुक हैं। कई लग्जरी होटलों में सम्मेलन के आसपास की तारीखों में कमरे उपलब्ध नहीं हैं। मांग बढ़ने के साथ किराये में भी 25 से 50 फीसदी तक उछाल आया है।
सम्मेलन में केवल राष्ट्राध्यक्ष और प्रतिनिधिमंडल ही नहीं, बल्कि सुरक्षा दल, प्रोटोकॉल अधिकारी, कारोबारी और मीडिया प्रतिनिधि भी दिल्ली पहुंच गए हैं। इसका असर होटल के साथ टैक्सी, लग्जरी कार, रेस्तरां और पर्यटन कारोबार पर भी पड़ रहा है। एयरपोर्ट, होटल और भारत मंडपम के बीच आवाजाही के लिए कार और चालक की मांग बढ़ी है।
कमरे कम, किराया एक-दो लाख तक
सेंट्रल दिल्ली में बचे कमरों का किराया 30 हजार रुपये से ऊपर चल रहा है। होटल की श्रेणी और तारीख के अनुसार यह एक से दो लाख रुपये प्रति रात किराया पहुंच गया है। कुछ प्रमुख होटलों में 10 से 12 सितंबर के लिए ऑनलाइन बुकिंग उपलब्ध नहीं है।
द ललित के महाप्रबंधक विशाल शर्मा के मुताबिक, सम्मेलन के दौरान होटल के 460 कमरों में करीब 90 फीसदी ऑक्यूपेंसी रहने की उम्मीद है। सामान्य दिनों की तुलना में औसत कमरे का किराया 30 से 40 फीसदी अधिक है। रेडिसन होटल समूह के प्रबंध निदेशक (दक्षिण एशिया) निखिल शर्मा ने बताया कि सितंबर में औसत कमरे का किराया पिछले वर्ष की तुलना में 25 फीसदी से अधिक बढ़ा है। ब्रिक्स से मांग को और मजबूती मिली है। रोजिएट होटल्स एंड रिसॉर्ट्स के सीईओ कुश कपूर के अनुसार, सम्मेलन के दौरान होटल कारोबार में सामान्य मांग के मुकाबले 30 से 50 फीसदी तक वृद्धि की उम्मीद है।
एयरोसिटी में भी 80-90 फीसदी ऑक्यूपेंसी
ब्रिक्स का असर एयरोसिटी में भी दिख रहा है। लेमन ट्री होटल्स के सेल्स मैनेजर वैभव जैन के मुताबिक, एयरोसिटी में करीब 3,500 कमरे हैं। सम्मेलन के दौरान सामान्य सप्ताहांत की तुलना में ऑक्यूपेंसी में 5 से 7 फीसदी और कमरे के किराये में 15 से 20 फीसदी तक वृद्धि की उम्मीद है। इन दिनों ऑक्यूपेंसी 80 से 90 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है।
ब्रिक्स के बाद सेमीकॉन से फिर बढ़ेगी मांग
होटल कारोबार को ब्रिक्स के बाद भी राहत मिलने वाली नहीं है। 17 से 19 सितंबर तक यशोभूमि में सेमीकॉन इंडिया का आयोजन होना है। ऐसे में ब्रिक्स के प्रतिनिधियों के लौटने के कुछ ही दिन बाद कारोबारी और उद्योग जगत के प्रतिनिधि पहुंचेंगे। होटल उद्योग विशेषज्ञ रतन केसवानी के मुताबिक, बड़े सम्मेलनों में शुरुआती टीमें और सुरक्षा दल कई दिन पहले पहुंच जाते हैं और सम्मेलन के बाद भी रुकते हैं। इससे होटलों को अतिरिक्त राजस्व मिलता है।