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Silent Bomb: संक्रमण का साइलेंट बम, सफदरजंग अस्पताल में खतरकनाक स्तर तक पहुंचा बायोमेडिकल वेस्ट; खतरे की घंटी

Fri, 06 Feb 2026 03:59 AM IST
दुष्यंत शर्मा ललित कौशिक, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

राजधानी के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सफदरजंग में बायोमेडिकल वेस्ट पिछले साल की तुलना में खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है।
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सफदरजंग अस्पताल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाज की जगह अब खतरे की घंटी बज रही है। राजधानी के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सफदरजंग में बायोमेडिकल वेस्ट पिछले साल की तुलना में खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है। अस्पताल की वार्षिक रिपोर्ट-2025 ने न सिर्फ संक्रामक कचरे में बढ़ोतरी उजागर की है, बल्कि स्वास्थ्यकर्मियों, मरीजों और पर्यावरण की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति को सौंप दी गई है, लेकिन बढ़ते मेडिकल कचरे की चुनौती अब नजरअंदाज करना मुश्किल हो गया है।

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अस्पताल ने पर्यावरण विभाग को पत्र भी लिखा है। इसमें अस्पताल में सालभर में उत्पादित बायोमेडिकल वेस्ट और उसके निपटान का ब्यौरा दिया गया है। अस्पताल में बायोमेडिकल वेस्ट को येलो, रेड, वाइट और ब्लू श्रेणी में अलग-अलग करके एकत्रित करके के बाद में उसको निपटान के लिए भेजा जाता है। वर्ष 2025 में सबसे ज्यादा येलो श्रेणी का बायोमेडिकल वेस्ट एकत्रित हुआ है।

बायोमेडिकल वेस्ट में क्लीनिकों और लैब से निकलने वाला संक्रामक कचरा शामिल है। इसमें शरीर से निकलने वाला तरल पदार्थ, खून, खून से सने कपड़े, प्लास्ट कास्ट, ड्रेसिंग, कॉटन, सुइयां, सिरिंज, ब्लेड, स्केलपेल, टूटा हुआ कांच, कैथेटर, ट्यूबिंग, दस्ताने, आईवी सेट, कल्चर स्टॉक सहित कई दूसरी चीजें शामिल है।
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रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन को लेकर 881 प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए। इसमें सभी विभागों के 8529 कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया। जबकि वर्ष 2024 में 1107 सत्र के जरिए 10095 को प्रशिक्षण और वर्ष 2023 में 528 सत्रों में 9058 को प्रशिक्षित किया गया। बता दें कि अस्पतालों में बायोमेडिकल वेस्ट को अलग-अलग रंग के बड़े बॉक्स में एकत्रित किया जाता है।

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