इलेक्ट्रिक बसों से होने वाले हादसों को देखते हुए दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) ने सख्त कदम उठाया है। डीटीसी ने ई-बस चलाने वाली निजी कंपनियों को मेडिकल बोर्ड गठित करने की हिदायत दी है। बोर्ड से चालकों के स्वास्थ्य की सटीक जांच कराने को कहा है। इससे फिटनेस सर्टिफिकेट मिलने के बाद ही संबंधित चालक को सेवा में रखा जाएगा। इस बारे में डीटीसी ने संबंधित कंपनियों को पत्र लिखा है।
दरअसल, दिल्ली परिवहन निगम में चालकों व परिचालकों की भर्ती में स्वास्थ्य जांच पर जोर रहता है। इसके लिए निगम का अपना मेडिकल बोर्ड भी है। लेकिन जिन सेवा शर्तों पर निजी कंपनियां दिल्ली में ई-बस चला रही हैं, उसमें ई-बस का कंडक्टर तो डीटीसी का होता है, लेकिन चालकों की नियुक्ति वही कंपनी करती है, जिसके पास बस चलाने का जिम्मा है। कंपनियां अपने हिसाब से चालकों की भर्ती करती है। डीटीसी को शिकायतें मिली हैं कि बगैर उचित जांच के चालकों की भर्ती की गई है।
डीटीसी कर्मचारी एकता यूनियन के महासचिव मनोज शर्मा ने बताते हैं कि डीटीसी में चालक की नियुक्ति के लिए मेडिकल बोर्ड बना है। बोर्ड अगर फेल कर देता है तो चालक को नौकरी नहीं मिल सकती। जबकि निजी कंपनियों में इस तरह की व्यवस्था नहीं है। ऐसी घटनाओं से डीटीसी की छवि धूमिल हो रही है। निजी कंपनियों के चालकों पर किमी पूरे करने का दबाव भी है। ऐसे में डीटीसी का मेडिकल बोर्ड गठन करने का निजी कंपनियों को भेजा गया प्रस्ताव कारगर हो सकता है।
बेड़े में जल्द शामिल होंगी 50 इलेक्ट्रिक बसें
इलेक्ट्रिक बसों के बेड़े में जल्द 50 और बसें शामिल होंगी। अधिकारियों के अनुसार, नवंबर अंत या फिर दिसंबर तक बसों के शामिल होने की उम्मीद है। इससे पहले अभी तक राजधानी की सड़कों पर 600 इलेक्ट्रिक बसें चल रही हैं। जबकि अगले साल मार्च के आखिर तक इनकी संख्या 1500 तक होनी है।
हाल में हुए हादसे
19 नवंबर को रोहिणी इलाके में एक इलेक्ट्रिक बस पलट गई, हादसे में कोई गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ।
चार नवंबर को रोहिणी सेक्टर तीन में इलेक्ट्रिक बस बेकाबू होकर कई वाहनों को टक्कर मार दी। हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि एक अन्य युवक घायल हो गया।