विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस रोग को लेकर लोगों के बीच जागरूकता बढ़ती है तो समस्या शुरू होने से पहले ही इसे रोका जा सकता है। देश की चार फीसदी लोगों में यह रोग होने का अनुमान है, लेकिन जागरूकता के अभाव में रोग का पता नहीं चलता। इस रोग की रोकथाम के लिए मंगलवार को लेडी हार्डिंग अस्पताल में विशेषज्ञ एकजुट हुए।
इस दौरान अस्पताल के पीएमआर विभाग की प्रोफेसर व प्रमुख डॉ. रितु मजूमदार ने कहा कि यदि आप दीवार के सहारे खड़े होते हैं और आपकी गर्दन दीवार से कुछ दूर रहती है तो सचेत होने की जरूरत है। हो सकता है कि यह अंकिलोसिंग स्पॉन्डिलाइटिस रोग की शुरुआत हो। यह 20 से 40 साल के लोगों को प्रभावित करता है। यह महिलाओं के मुकाबले पुरुषों में तीन गुना अधिक हो सकता है।
अस्पताल में मेडिसिन विभाग के प्रमुख व निदेशक प्रोफेसर डॉ. एल एच घोटेकर ने कहा कि हर किसी को इसके बारे में जागरूक होना चाहिए। यह किसी को भी प्रभावित कर सकता है। इसका पता लगाने के लिए एचएलए बी27, सीआरपी और ईएसआर जांच किया जाता है। इसका प्रभाव हर व्यक्ति पर अलग-अलग होता है। यदि समय रहते इसकी रोकथाम न किया जाए तो सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।