विवेक विहार स्थित बेबी केयर न्यू बोर्न अस्पताल में छह नवजातों को मौत जलने से नहीं, बल्कि दम घुटने से हुई थी। आग बच्चों के बिस्तर तक नहीं पहुंची थी। हालांकि, तपिश से त्वचा झुलस गई थी। पुलिस अधिकारियों को ये जानकारी पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टरों ने दी है। वहीं, अस्पताल में तीन बीएएमएस (आयुर्वेदिक) डॉक्टर रखे हुए थे। पुलिस अस्पताल में ड्यूटी कर रहे दो अन्य डॉक्टरों से भी पूछताछ करेगी।
शाहदरा जिले के पुलिस सूत्रों के अनुसार, आग नवजातों के कमरे तक नहीं पहुंची थी। बच्चों के बिस्तर पर इलाज के कागजात सही सलामत मिले हैं। पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टरों ने बताया कि छह नवजातों की दम घुटने से मौत हुई है। बच्चों के ब्लड सैंपल लिए गए हैं और विसरा सुरक्षित रख लिया गया है। इधर, विवेक विहार थाना पुलिस ने सोमवार को नोटिस जारी कर बिजली, फायर, डीजीएचएस व स्वास्थ्य विभाग से रिपोर्ट मांगी है। सभी को जल्द रिपोर्ट देने को कहा गया है, ताकि पुलिस की जांच आगे बढ़ सके।
अस्पताल में तीन बीएएमएस रखे हुए थे
डॉक्टर नवीन ने अस्पताल में तीन बीएएमएस रखे हुए थे। डाॅ. आकाश गिरफ्तार हो चुके हैं। अब दो से पूछताछ की जाएगी। इसके अलावा अस्पताल में क्षमता से ज्यादा 32 सिलिंडर रखे हुए थे। पांच बिस्तरों वाले अस्पताल में ये सिलिंडर बहुत ज्यादा हैं। हालांकि, सिलिंडर रखने को लेकर कोई स्पष्ट निर्देश नहीं हैं।
अस्पताल मालिक की पत्नी से होगी पूछताछ
विवेक विहार के बेबी केयर न्यू बॉर्न अस्पताल में आग लगने के बाद सात नवजातों की मौत के मामले में पुलिस अस्पताल के मालिक डॉ. नवीन और ड्यूटी पर तैनात डॉ. आकाश को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है। पुलिस ने मंगलवार को नवीन की पत्नी डॉ. जागृति को पूछताछ में शामिल होने के लिए समन भेजा है। दांतों की डाॅक्टर जागृति अस्पताल में साझेदार हैं। पुलिस का कहना है कि मामले में नवीन के साथ जागृति की भी जिम्मेदारी बनती है। ऐसे में उनसे बुधवार को पूछताछ हो सकती है।
वहीं, पुलिस की पूछताछ में आकाश ने खुद को बेकसूर बताया है। उनका कहना है कि डॉ. नवीन ने 40 हजार रुपये महीना सैलरी पर रखा था। आग लगने पर वे अस्पताल से भागे नहीं। आखिरी दम तक बच्चों को बचाने और सुरक्षित निकालने में मदद की। इधर, पुलिस ने नोटिस जारी कर अस्पताल के सभी डॉक्टरों, नर्स, पैरा मेडिकल स्टाफ के अलावा दूसरे कर्मचारियों से डिग्रियां मांगी हैं। सभी के मोबाइल और सीडीआर की पड़ताल की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि पति-पत्नी ने अस्पताल में अनुभवी डॉक्टरों की जगह पैसे बचाने के लिए बीएएमएस डॉक्टरों को रखा हुआ था। इसकी भी जांच की जा रही है।
पंजाबी बाग, फरीदाबाद व गुरुग्राम के अस्पताल की भी होगी जांच
पुलिस को पता चला है कि विवेक विहार के अलावा नवीन और जागृति के पंजाबी बाग, फरीदाबाद और गुरुग्राम में भी बेबी केयर अस्पताल के नाम से शाखाएं हैं। इन अस्पताल में डॉक्टर, नर्स और पेरा मेडिकल स्टाफ की डिग्री से लेकर अस्पताल के लाइसेंस की जांच पुलिस कर सकती है। विवेक विहार में आग लगने के बाद ऑक्सीजन सिलिंडर एक के बाद एक फटने लगे थे। जांच में पता चला है कि क्षमता से ज्यादा सिलिंडर यहां रखे हुए थे। आग लगने पर यह फट गए।
मोबाइल फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे
डॉ. नवीन और डॉ. आकाश को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने मोबाइल कब्जे में लेकर छानबीन शुरू कर दी है। सूत्रों का कहना है कि गिरफ्तारी से पूर्व इन लोगों ने फोन के अलावा व्हाट्सएप और एसएमएस के जरिये एक दूसरे से बातचीत की थी। पुलिस को आशंका है कि गिरफ्तारी से पूर्व इन एसएमएस व मैसेज को डिलीट कर दिया गया। अब फॉरेंसिक एक्सपर्ट इनसे डाटा दोबारा प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं। पुलिस जागृति का मोबाइल भी कब्जे में ले सकती है।
नर्सिंग होम के पंजीकरण, नियामक प्रबंधन की एसीबी करेगी जांच
विवेक विहार के न्यू बॉर्न बेबी केयर अस्पताल में सात नवजातों की मौत मामले में उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने मंगलवार को कड़ा कदम उठाया। उन्होंने राजधानी के सभी निजी नर्सिंग होम के पंजीकरण और नियामक प्रबंधन की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) से जांच कराने के आदेश दिए हैं। एसीबी यह जांच करेगी कि कितने नर्सिंग होम बिना पंजीकरण चल रहे हैं। ये भी जांच होगी कि क्या अस्पताल दिल्ली नर्सिंग होम पंजीकरण अधिनियम, 1953 और उसके तहत बनाए गए नियमों के तहत निर्धारित मानदंडों का पालन कर रहे हैं या नहीं।
उपराज्यपाल के अनुसार, राजधानी में 1190 नर्सिंग होम हैं, जिनमें से एक चौथाई से अधिक वैध पंजीकरण के बिना चल रहे हैं। इसके अलावा शहर में कई ऐसे नर्सिंग होम हैं, जिन्होंने कभी पंजीकरण के लिए आवेदन नहीं किया, लेकिन फिर भी संचालित हो रहे हैं। यहां तक कि ऐसे नर्सिंग होम भी हैं जिनके पास वैध पंजीकरण है, लेकिन वे दिल्ली नर्सिंग होम पंजीकरण अधिनियम, 1953 और उसके तहत बनाए गए नियमों के अनुसार निर्धारित सुरक्षा और नियामक मानकों को पूरा नहीं कर रहे हैं। जांच में यह पता लगेगा कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से पंजीकरण की मंजूरी या नवीनीकरण 100 प्रतिशत साइट निरीक्षण के बाद दी गई थी या नहीं। इससे यह भी पता लगेगा कि नर्सिंग होम में अपेक्षित सुरक्षा मानदंडों को पूरा करने की क्या कोई जांच सूची है। साथ ही, कानून के तहत प्रदान किए गए चिकित्सा बुनियादी ढांचे हैं या नहीं। एसीबी स्वास्थ्य विभाग के संबंधित लोक सेवकों की मिलीभगत और लापरवाही को सामने ला सकती है।
पंजीकरण के लिए ऑफलाइन प्रक्रिया
एलजी ने कहा कि इस आधुनिक युग में दिल्ली में नर्सिंग होम का पंजीकरण मैन्युअल किया जा रहा है। इससे अस्पष्टता और भ्रष्टाचार के लिए बहुत जगह है। मुख्य सचिव यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि अनुपालन, पंजीकरण और वैधता के सभी डाटा के साथ एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया जाए। इसके अलावा मुख्य सचिव को निर्देश दिया गया है कि सभी जिलाधिकारियों को सलाह दी जाए कि वे कार्यात्मक नर्सिंग होम की दो सप्ताह के भीतर वास्तविक संख्या का पता लगाकर सत्यापन करें। इससे समस्या की भयावहता और शहर में व्याप्त उल्लंघन की सीमा का पता चलेगा।