आजमगढ़ के पवन कुमार यादव ने सीडीएस चौहान को उनकी प्रतिकृति भेंट की।
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सीडीएस चौहान बच्चों से अनौपचारिक रूप से मिले तो खुद बच्चे बन गए। खुद भी बचपन की कहानियां सुनाने लगे। एक बच्चे ने उनसे सेना में आने पर घरवालों की प्रतिक्रिया पूछ ली। इस पर मुस्कराते हुए उन्होंने कहा कि पिताजी को जब पता चला कि मैंने सेना में नौकरी के लिए फॉर्म भरा है, तो वह एकदम दु:खी हो गए। हालांकि अफसर बनने के बाद वह खुश भी बहुत हुए।
बच्चों से बातचीत करने के लिए वह खुद उनके पास चले गए...वह उनके भविष्य के लिए भी सलाह देते रहे। एक बच्चे को तो उन्होंने यह भी बता दिया कि सेना में आना है तो लंबाई बढ़ाओ। इसके बाद कुछ व्यायाम भी उसको बताए, जिससे लंबाई बढ़ाने में मदद मिले। डाइट को लेकर एक बच्चे के सवाल पर वह बोले जो आसपास मिलता है, वही खाओ। ऐसा कुछ नहीं है कि अमुक चीज खाओगे तो सेहत बनेगी। जो स्थानीय खाद्य पदार्थ होता है, वही हमारे शरीर को भी पचता है। उसी से हमारे शरीर की जरूरतें पूरी होती हैं।
देश में आतंकवादियों की घुसपैठ के सवाल पर कहा कि सीमाएं बहुत बड़ी हैं। 100 फीसदी किसी भी सीमा को सुरक्षित नहीं किया जा सकता है। यह चोर-सिपाही जैसा खेल है जिसमें हम घुसपैठियों को रोकने की कोशिश करते हैं।
दृष्टिबाधित बच्चों से भी मिले
सीडीएस चौहान अपनी पत्नी अनुपमा के साथ छात्रवृत्ति पाने वाले दृष्टिबाधित बच्चों शिवानी रावत और जयप्रकाश मौर्य से भी मिले। उनकी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति की प्रशंसा की।