अनामिका शुक्ला प्रकरण में एक और खुलासा हुआ है। इस बार मामला बुलंदशहर का है। अनामिका शुक्ला स्थानीय तहसील के कस्तूरबा विद्यालय में वर्ष 2018-19 में नौकरी कर चुकी है। अफसर मामले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं। मामले में लापरवाही सामने आने के बाद बीएसए ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है। जानकारी के मुताबिक कस्तूरबा विद्यालय में नौकरी के दौरान अनामिका ने करीब एक लाख से ऊपर सैलरी ली है।
क्या है पूरा मामला
अनामिका के नाम पर कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में फर्जी शिक्षिकाओं की नियुक्ति का खेल सात साल पहले शुरू हुआ। मास्टरमाइंड राज उर्फ पुष्पेंद्र और उसके भाई जसवंत ने जालसाजी कर मैनपुरी के करहल ब्लॉक के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में दीप्ति नाम की युवती को अनामिका नाम से फर्जी नियुक्ति दिलाई। वहीं से फर्जीवाड़े का यह खेल शुरू हुआ और अब यह खेल कासगंज में गिरफ्तार सुप्रिया पर आकर ठहरा है।
असली अनामिका शिक्षा विभाग के सामने आ चुकी है, लेकिन उसके दस्तावेजों से फर्जीवाड़े का खेल सालों से चल रहा है। अनामिका शुक्ला के नाम से सबसे पहली नियुक्ति दीप्ति नाम की युवती को वर्ष 2013 में मैनपुरी के करहल ब्लॉक के कस्तूरबा विद्यालय में जालसाजों ने दिलाई।
गिरफ्तार जालसाज से हुई पूछताछ में यह खुलासा हुआ है। उसके बाद फर्जीवाड़े का खेल अन्य जिलों में चलता रहा। इन सात वर्षों में अलीगढ़, सहारनपुर, रायबरेली, फैजाबाद, अमेठी सहित कई जिलों में जालसाजों ने फर्जी नियुक्तियां कराईं। जालसाज के गिरफ्तार भाई ने 20 फर्जी नियुक्तियां कराने की बात कही है।