एक तरफ राजधानी में गणतंत्र दिवस की तैयारियों को लेकर सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद की जा रही है। दूसरी ओर एम्स दिल्ली जैसे नामचीन अस्पताल की पार्किंग में लावारिस वाहन धूल फांक रहे हैं। इनकी सुध लेने वाला भी कोई नहीं है। इससे अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पार्किंग के हालात को लेकर अमर उजाला के संवाददाता ने खुद मौके पर जाकर बुधवार को जायजा लिया।
एम्स में उपचार के लिए ओपीडी में आने वाले मरीजों और तीमारदारों के लिए बेसमेंट पार्किंग नंबर तीन में वाहनों के पार्क करने की व्यवस्था है। पार्किंग के पिलर नंबर यूबी-3/6 के सामने लावारिस हालत में दोपहिया वाहन पार्क हैं। इसमें दो स्कूटी और एक बाइक शामिल है। वाहनों पर धूल का गुबार जमा हो रखा है। इसमें बाइक के पीछे के हिस्से में नंबर प्लेट तक गायब है।
इसी तरह पार्किंग शुल्क के काउंटर के नजदीक भी अलग-अलग राज्यों के पंजीकृत दोपहिया वाहन लावारिस हालत में खड़े हैं। इसमें कुछ बाइक के टायरों की हवा तक निकली है। ऐसी ही तस्वीर पार्किंग के दूसरे हिस्से में भी जगह-जगह बनी हुई है जिसमें गाड़ियां भी लावारिस हालत में खड़ी हैं। सबसे ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि पार्किंग में प्रवेश के दौरान वाहनों की कोई जांच नहीं होती है।
परिसर में जमा है कबाड़
पार्किंग परिसर में केंद्र सरकार के स्वच्छता अभियान की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। परिसर में जगह-जगह कबाड़ जमा हो रखा है। टूटी-फूटी अलमारी, पत्थर, लोहे की जाली, कुर्सी, मेज, डक्टिंग वेंटिलेशन इधर-उधर पड़े हैं। हैरानी वाली बात यह है जिस जगह से दोपहिया वाहनों की निकासी का रास्ता है, उसके बीच में भी बेकार सामान पड़ा है। इससे दोपहिया वाहन चालकों को निकलने में मुश्किल होती है। दीवारों पर धूल जमी और जाले लगे हुए है। पार्किंग के फर्श पर धूल जमा हो रखी है। परिसर में पानी की निकासी वाली नाली पर लगी लोहे की जाली अंदर धंस रही है।
खुले पड़े हैं बिजली के स्विच बोर्ड
पार्किंग में बिजली के स्विच बोर्ड भी खस्ता हालत में हैं। पिलर नंबर यूबी-3/4 में लगा बिजली के स्विच बोर्ड खुला है। बोर्ड से स्विच बाहर निकले लटके पड़े हैं। हैरानी की बात यह है कि पिलर से सटकर दोपहिया वाहन भी पार्क होते हैं। जब पार्किंग से निकलर सीढ़ियों के रास्ते से सबसे ऊपरी मंजिल की ओर बढ़ेंगे तो दीवार पर लगे बिजली का बोर्ड स्विच बाहर निकला पड़ा दिखेगा। पार्किंग के बदतर हालात एम्स मीडिया सेल प्रमुख डॉ. रीमा दादा के संज्ञान में लाने पर उन्होंने कहा कि इस संबंध में कार्रवाई के लिए सीएसओ और फैकल्टी इंचार्ज को सूचित कर दिया है।