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एम्स में 360 करोड़ की लागत से बनेगी 16 मंजिल की नई इमारत, 20 बिंदुओं पर जारी की थी एडवाइजरी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 18 Aug 2019 05:27 AM IST
AIIMS - फोटो : अमर उजाला
गर्मियों में आग से जुड़ी घटनाएं बढ़ जाती हैं। एम्स प्रबंधन ने ऐहतियात बरतते हुए 20 बिंदुओं पर बीते मार्च माह में एडवाइजरी जारी की थी। इसमें सभी विभागों को बचाव के उपायों के स्पष्ट निर्देश थे। ऐसी ही एक एडवाइजरी एम्स ट्रॉमा सेंटर में आग लगने के बाद भी जारी की गई थी। 

एम्स निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने सभी विभागों के फैकल्टी को लिखित एडवाइजरी भेजकर तत्काल अमल के निर्देश भी दिए थे। इसके बावजूद हुए शनिवार के बादसे के बाद कई सवाल उठने लगे हैं। शनिवार को अवकाश के कारण आमतौर पर फैकल्टी सदस्यों के ऑफिस बंद थे। 

ये भी पढ़ेंः बीते दो साल में एम्स में लगी दो बार आग, अगर उठाए जाते यह कदम तो न होता नुकसान

टीचिंग ब्लॉक की दूसरी मंजिल पर ऑफिस के अलावा प्रयोगशालाएं भी हैं। ऐसे में बड़ा सवाल है कि आग की शुरूआत प्रयोगशाला या किसी फैकल्टी सदस्य के दफ्तर से तो नहीं हुई? देर रात तक एम्स प्रबंधन और दमकल विभाग इस पर कोई जानकारी नहीं दे सके थे।

एम्स प्रबंधन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एडवाइजरी के जरिये सभी विभागों को अलर्ट पर रखा गया था। प्रबंधन ने पूरे परिसर में बिजली के तारों की जांच के निर्देश दिए हैं, ताकि शॉर्ट सर्किट की आशंका को कम किया जा सके। आगजनी से बचने और इमरजेंसी निकास के इंतजाम की जांच के लिए प्रबंधन ने एक कमेटी भी बनाई थी।

केंद्र सरकार सतर्क, स्वास्थ्य मंत्री ने दिए निर्देश
आग की घटनाओं पर कई सुलगते सवालों पर चुप रहने के बाद एम्स प्रबंधन ने शनिवार देर रात बयान जारी किया। बताया जा रहा है कि देर रात तक एम्स की आग पर केंद्र भी सतर्क हो चुका है। इसके पीछे बड़ी वजह पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली और उनके परिवार का एम्स में होना बताया जा रहा है। 

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खबर मिली है कि देर रात केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने एम्स के अधिकारियों से पूरी घटना की जानकारी लेने के बाद तत्काल ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। उधर, एम्स ने भी देर रात कंट्रोल रूम का एक हेल्पलाइन नंबर 011-26593308 जारी किया है, जहां फोन करके एबी1 वार्ड यानी हड्डी रोग विभाग के वार्ड में भर्ती मरीजों के सुरक्षित होने की जानकारी ली जा सकती है। एम्स ने कुछ वार्ड को आरपी सेंटर में शिफ्ट कर दिया है। 
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एम्स की आग से सुलगते सवाल

1. कुछ ही माह पहले ट्रॉमा सेंटर में आग से पांच ओटी क्षतिग्रस्त हुए थे। एम्स ने इससे सबक क्यों नहीं लिया?
2. शनिवार को छुट्टी होने के बाद भी टीचिंग ब्लॉक में बिजली उपकरण कैसे चालू थे?
3. शुरुआती जांच में आग की वजह शॉर्ट सर्किट बताई गई। आग को शुरू में ही क्यों नियंत्रण में नहीं लाया जा सका?
4. एम्स में अत्याधुनिक अग्निशमन यंत्र जगह-जगह लगे हुए हैं। इनकी जांच भी साल में कम से कम दो बार होती है। फिर भी ये यंत्र आग पर काबू पाने में नाकाफी क्यों साबित हुए?
5. परिसर में मौजूद कई पुरानी इमारतों को लेकर आखिर अब तक ऐहतियात क्यों नहीं बरती गई? 
6. एम्स के बिजली विभाग में सैकड़ों कर्मचारी हैं। ये सप्ताह में कम से कम दो से तीन बार हर विभाग का निरीक्षण करते हैं। इतनी जांच के बाद भी शॉर्ट सर्किट कैसे हुआ।
7. आग से हजारों मरीजों के इलाज से जुड़े दस्तावेज का नुकसान हुआ है? इसकी भरपाई एम्स प्रबंधन कैसे करेगा?
8. टीचिंग ब्लॉक में लगी आग की जांच के लिए अब तक उच्च स्तरीय जांच की घोषणा क्यों नहीं की?
9. दमकल विभाग का दावा है कि वे 6 मिनट में मौके पर पहुंच गए थे। फिर आग दूसरी से पांचवीं मंजिल तक कैसे पहुंची?
10. दमकल विभाग 4 घंटे बाद भी एम्स की आग को काबू नहीं पा सका, जबकि बाहर बारिश भी थी, जो आग की बाहर की ओर आने से रोक रही थी।
11. आग लगने के बाद पूरे परिसर की बिजली काट दी गई, जबकि आपातकालीन वार्ड में गंभीर हालत वाले मरीज थे।
12. एम्स आपातकालीन विभाग में सभी मरीजों को सुरक्षित बता रहा है, जबकि आग लगने के बाद से वार्ड पूरी तरह से बंद था और मरीजों को रेफर किया जा रहा था?
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