एक वर्ष में 1703 मरीजों को एम्स ने दी रोशनी
एम्स के आरपी सेंटर के प्रोफेसर डॉ. तुषार अग्रवाल का कहना है कि साल 2023-24 में राष्ट्रीय नेत्र बैंक में 2000 से अधिक कार्निया एकत्रित किए गए। यह पिछले तीन सालों में सबसे ज्यादा है। यही कारण है कि 1703 मरीजों की कार्निया प्रत्यारोपण सर्जरी हुई। दान में एकत्रित 85 फीसदी कार्निया का प्रत्यारोपण में इस्तेमाल किया जा सका।
छह लोगों को मिल सकती है रोशनी
डाॅ. तुषार का कहना है कि कार्निया में छह परत होती है। कई मरीजों को कार्निया के सिर्फ एक परत के प्रत्यारोपण की जरूरत होती है। एक कार्निया से तीन लोगों को प्रत्यारोपण हो सकता है। इसलिए एक व्यक्ति के दोनों कार्निया दान से छह लोगों की आंखों को रोशनी मिल सकती है। डाॅक्टरों का कहना है कि देश में हर वर्ष करीब एक लाख लोगों को कार्निया प्रत्यारोपण की जरूरत होती है, लेकिन 35-40 हजार लोगों को ही प्रत्यारोपण हो पाता है।
12 साल से कम उम्र के बच्चों को प्राथमिकता
कार्निया प्रत्यारोपण के लिए 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्राथमिकता दी जाती है। जिन मरीजों की कार्निया प्रत्यारोपण सर्जरी की गई, उनमें 40 फीसदी मरीजों की आखों में अल्सर था। 29.35 प्रतिशत मरीजों की आंख में चोट के कारण कार्निया खराब होने से रोशनी चली गई थी। पिछले 58 वर्षों में राष्ट्रीय नेत्र बैंक (एनईबी) ने अभी तक 32 हजार से अधिक कॉर्निया एकत्र किया।