डीसीपी ग्रामीण विवेक यादव ने बताया कि लोनी की अशोक विहार कॉलोनी की निवासी सितारा पहली बार 2006 में पकड़ी गई थी। वह 2003 से चरस बेच रही है। उसके पति अख्तर मलिक की मौत हो चुकी है। उसके गिरोह में नेपाल के लोग भी हैं। उसने पूछताछ में बताया कि वह पहले छोटे स्तर पर मादक पदार्थ घर से ही बेचती थी। 2006 में जेल में उसकी मुलाकात नेपाल के एक युवक से हुई। वह बड़ा तस्कर है। उसका अड्डा बरेली में है।
वह बरेली से रोडवेज बस में चरस लाकर देता है। इस चरस के वह छोटे पैकेट बना लेती है। इसके बाद जिसकी जैसी मांग होती है, उसी हिसाब से पैकेट बनाकर वह बेचती है। मोटी कमाई होने लगी तो इसमें बेटे को भी शामिल कर लिया। उसके पकड़े जाने के बाद अकेले ही चरस के पैकेट बेच रही थी। नौ किलो चरस कुछ दिन पहले ही नेपाल का युवक दे गया था। डीसीपी ने बताया कि सितारा के पूरे नेटवर्क का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। उसके खिलाफ गाजियाबाद और दिल्ली में मादक पदार्थ तस्करी के केस दर्ज हैं।
मोबाइल में मिले तस्करों और ग्राहकों के नंबर
पुलिस को सितारा के मोबाइल फोन में कई संदिग्ध नंबर मिले हैं। माना जा रहा है कि ये तस्करों और उससे चरस खरीदने वाले ग्राहकों के हैं। पुलिस नंबरों के बारे में जानकारी कर रही है। दस से ज्यादा नंबर लोनी के ही निकले हैं। तीन नंबर बरेली के बताए गए हैं। उसने पुलिस पूछताछ में एक भी तस्कर और ग्राहक का नाम नहीं बताया। पुलिस का कहना है कि मोबाइल की जांच पूरी होने पर कई राज खुल सकते हैं।
एनसीआर में बढ़ रही चरस और गांजे की तस्करी
गाजियाबाद पुलिस ने इस साल दस करोड़ से ज्यादा का गांजा बरामद किया है। दस से ज्यादा तस्करों को पकड़ा है। इसी तरह चरस और इसके तस्कर कई बार पकड़े जा चुके हैं। ये सभी तस्कर पूरे एनसीआर में सप्लाई के लिए मादक पदार्थ लेकर आते हैं। पुलिस एक बार भी यह मालूम नहीं कर सकी है कि पकड़े गए लोगों से मादक पदार्थ कौन खरीदता था। तस्करों के गिरोह के सरगना भी नहीं पकड़े गए हैं। पुलिस की इसी नाकामी का नतीजा है कि एनसीआर में गांजा और चरस जैसे मादक पदार्थों की तस्करी बढ़ती जा रही है।