संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने कहा कि किसी आरोपी के साफ इन्कार के बाद शिकायतकर्ता की मांग पर उसे नार्को एनालिसिस टेस्ट के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। न्यायामूर्ति पुरुषइंद्र कुमार कौरव ने 21 वर्षीय महिला की मौत के मामले में उसके पिता की याचिका खारिज कर दी। पिता ने आरोपियों का नार्को टेस्ट कराने की मांग की थी। दो आरोपियों जसपाल उर्फ टिंकू और विवेक कुमार उर्फ मोनू ने अदालत के सामने टेस्ट से इन्कार किया था। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के सेल्वी और अमलेश कुमार फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि बिना सहमति नार्को टेस्ट कराना व्यक्ति की संवैधानिक सुरक्षा और व्यक्तिगत आजादी के खिलाफ है। कोर्ट ने कहा कि पीड़ित परिवार को निष्पक्ष जांच का अधिकार है, लेकिन यह अधिकार आरोपी की संवैधानिक सुरक्षा से ऊपर नहीं हो सकता।