दिल्ली की एक अदालत ने 2009 में एक सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल से मारपीट के मामले में उनकी दोषसिद्धि के खिलाफ आप विधायक अब्दुल रहमान और उनकी पत्नी द्वारा दायर अपील को सोमवार को खारिज कर दिया। मजिस्ट्रेट अदालत ने इस साल अप्रैल में राजनेता और उनकी पत्नी को दोषी ठहराया था। हालाँकि, इसने उन्हें शांति और अच्छे व्यवहार बनाए रखने और किसी भी आपराधिक गतिविधि से दूर रहने की शर्त पर परिवीक्षा पर रिहा कर दिया था।
विशेष न्यायाधीश गीतांजलि गोयल ने पीड़िता की अपील भी खारिज कर दी, जिसने सजा बढ़ाने की मांग करते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। अपीलकर्ताओं ने राउज एवेन्यू कोर्ट के अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट द्वारा पारित 7 जून के फैसले के खिलाफ अपील दायर की थी।
दोषियों ने स्वयं को दोषी ठहराने के फैसले को चुनौती देते हुए तर्क रखा था कि उन्हें गलत तरीके से दोषी ठहराया गया है। वहीं शिकायतकर्ता ने इस आधार पर फैसले को चुनौती दी थी कि दोषियों को परिवीक्षा पर रिहा नहीं करना चाहिए था बल्कि उन्हें कड़ी सजा दी जानी चाहिए।
महिला पहलवान यौन उत्पीड़न मामले पर भी सुनवाई
वहीं दूसरी तरफ कोर्ट में महिला पहलवान यौन उत्पीड़न मामले में भाजपा नेता बृज भूषण शरण सिंह ने कहा कि एक शिकायतकर्ता का कहना है कि 16 अक्टूबर, 2017 को उसका यौन उत्पीड़न हुआ। अगले दिन वह कुश्ती संघ के दफ्तर गई थी, उस दिन बृजभूषण दिल्ली में मौजूद नहीं थे। अदालत ने सभी पक्षकारों से दलीलें की लिखित प्रति दो हफ्ते में जमा करने को कहा है।
बृजभूषण के वकील अजय अग्रवाल ने कहा कि शिकायतकर्ता ने वर्ष 2022 में बुल्गारिया व कुश्ती संघ के दफ्तर की घटना का जिक्र किया है। लेकिन कुश्ती संघ के दफ्तर की घटना का जिक्र ओवर साइट कमेटी के सामने नहीं की।
राऊज एवेन्यू कोर्ट के अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने कुछ दलीलें सुनने के बाद सभी पक्षकारों से दलीलें की लिखित प्रति दो हफ्ते में जमा करने को कहा और सुनवाई 22, 23,24 नवंबर के लिए स्थगित कर दी।