पश्चिम दिल्ली के ख्याला स्थित विष्णु गार्डन में मंगलवार देर रात इलेक्ट्रिक स्कूटी में चार्जिंग के दौरान अचानक आग लग गई। हादसे में दादी शरणजीत कौर (65) और पोता यशप्रीत सिंह (13) झुलस गए। दोनों को गुरु गोविंद सिंह अस्पताल ले जाया गया। जहां यशप्रीत को मृत घोषित कर दिया गया। वहीं अस्पताल में शरणजीत कौर को उपचार के बाद बुधवार छुट्टी दे दी गई। हादसे के समय यशप्रीत अपने चाचा गुरजीत सिंह के साथ ग्राउंड फ्लोर पर बने कमरे में सो रहा था। आग लगी तो चाचा की आंख खुल गई। गहरी नींद में सो रहे भतीजे को गुरजीत ने जगाने की खूब कोशिश की, लेकिन वह नहीं उठा। इस बीच स्कूटी की बैटरी और टायर ब्लास्ट हो गए।
गुरजीत को अपनी जान बचाकर वहां से निकलना पड़ा। आग के बीच परिजन पहली और दूसरी मंजिल से किसी तरह नीचे आए। पहली मंजिल से उतरते समय शरणजीत कौर के हाथ भी रेलिंग पकड़ने से झुलस गए। सूचना मिलने के बाद पुलिस व दमकल विभाग की चार गाड़ी मौके पर पहुंचीं। बाद में आग पर काबू पाया गया। शुरुआती जांच के बाद आशंका व्यक्त की जा रही कि स्कूटी में चार्जिंग के दौरान आग लगने या शार्ट-सर्किट की वजह से हादसा हुआ। क्राइम टीम व एफएसएल ने मौके से साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस ने बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद यशप्रीत का शव परिजनों के हवाले कर दिया। नाबालिग की मौत के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
पश्चिम जिला पुलिस उपायुक्त डीएस भास्कर ने बताया कि मंगलवार रात करीब 2.43 बजे उनकी टीम को सूचना मिली कि गली नंबर-9, विष्णु गार्डन, ख्याला के एक मकान में आग लग गई है। सूचना मिलते ही पुलिस के अलावा दमकल की चार गाड़ियां मौके पर पहुंची। यहां करीब 50 गज के मकान की पार्किंग में आग लगी थी।
दो मंजिला मकान में बलजीत सिंह के अलावा उनके तीन बच्चे बड़ी बेटी मनप्रीत कौर, बेटा यशप्रीत सिंह (13), छोटा बेटा जसकरण (7), बलजीत के पिता दर्शन सिंह, माता शरणजीत कौर और छोटे भाई गुरजीत रहते हैं। बलजीत की पत्नी परिवार से अलग रहती हैं। बलजीत का डाई बनाने का काम है, वहीं यशप्रीत पास के एक स्कूल में आठवीं कक्षा का छात्र था।
ग्राउंड फ्लोर पर बलजीत ने एक दुकान बनाई हुई है। दुकान के पीछे कुछ खाली जगह पर बाइक व स्कूटी पार्क होती है। इसके पीछे एक कमरा है जिसमें गुरजीत और यशप्रीत सोते थे। रात को जब आग लगी तो चाचा-भतीजे वहीं पर सो रहे थे। यशप्रीत गहरी नींद में था। इस बीच आग बढ़ी तो गुरजीत अपनी जान बचाकर वहां से निकल गया। बाद में आग कमरे के भीतर रखे सामान में भी पहुंच गई। हादसे में झुलसकर यशप्रीत की मौत हो गई। पुलिस आग की वजहों का पता लगाने का प्रयास कर रही है। बुधवार को उपचार के बाद दादी शरणजीत कौर को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
पिता का दो माह पूर्व हुआ था एक्सीडेंट : यशप्रीत के पिता बलजीत सिंह का डाई बनाते हैं। अक्सर वह काम के सिलसिले में मेरठ जाते रहते हैं। करीब दो माह पूर्व वह बाइक से मेरठ से दिल्ली लौट रहे थे। इस बीच उनकी बाइक का संतुलन बिगड़ा और वह हादसे के शिकार हो गए। उनकी टांग गई जगह से टूट गई। फिलहाल अभी भी वह ठीक से चल नहीं पाते हैं। मंगलवार देर रात जब आग लगी तो वह पहली मंजिल पर मौजूद थे। किसी तरह उन्होंने अपनी जान बचाई।