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Noida : 50 मिनट लिफ्ट में फंसी बुजुर्ग महिला, बीच रास्ते अटकने से हुई मौत, पारस टिएरा सोसाइटी का मामला

Thu, 03 Aug 2023 11:45 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा

सार

महिला लिफ्ट से आठवीं मंजिल पर जा रही थी। तभी अचानक लिफ्ट खराब हो गई और नीचे गिर गई। गंभीर रूप से घायल महिला को तुरंत अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
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लिफ्ट का गिरा हिस्सा और सोसाइटी के बाहर जमा भीड़ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सेक्टर-137 के पारस टियेरा सोसाइटी में बृहस्पतिवार शाम 50 मिनट तक लिफ्ट में फंसी सुशीला देवी (70) की मौत हो गई। बताया जाता है कि 24वीं मंजिल से नीचे आ रही लिफ्ट का तार टूट गया और वह बीच में ही फंस गई। बुजुर्ग काफी देर तक लिफ्ट में फंसी रहीं और उन्हें बाहर नहीं निकाला जा सका तो वह बेहोश हो गईं।

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घटना के बाद निवासियों का आक्रोश फूट पड़ा। निवासियों ने एओए अध्यक्ष रमेश गौतम को घेरकर इस्तीफे की मांग की। आरोप है कि पुलिस ने लाठीचार्ज किया। लेकिन, पुलिस का कहना है कि समझा बुझाकर लोगों को हटाया गया। पुलिस मृतका के बेटे की शिकायत पर केस दर्ज कर मामले की जांच कर रही है।

निवासियों ने बताया कि सुशीला देवी अपने बेटे व बहू के साथ सोसाइटी की 24 वीं मंजिल पर रहतीं थीं। वह अकेली शाम को नीचे आने के लिए लिफ्ट में गईं थीं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि लिफ्ट का तार टूटने से वह बीच में कहीं फंस गई, जमीन पर नहीं गिरी।
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इस बीच महिला ने काफी शोर मचाया, लेकिन किसी ने नहीं सुना। महिला कुछ देर बाद बेहोश हो गई। इसके बाद सुशीला को बाहर निकालकर निजी अस्पताल ले जाया गया,जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। करीब सवा सात बजे पुलिस को हादसे की सूचना मिली। इसके बाद निवासी सोसाइटी में एकत्रित होकर हंगामा करने लगे।

लिफ्ट की सुरक्षा के लिए यह सिस्टम होना आवश्यक

  • पैनिक अलार्म सिस्टम : लिफ्ट में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पैनिक अलार्म सिस्टम होना चाहिए। तकनीकी खराबी की वजह से अगर लिफ्ट बंद हो जाए तो उसमें फंसा व्यक्ति इस अलार्म को बजा सकता है। इससे सोसाइटी में लगे हूटर जोर-जोर से बजने लगेंगे, जिससे फंसे व्यक्ति को मदद मिल जाती है।
  • इंटरकॉम : हूटर पर अगर कोई रिस्पॉन्स नहीं मिले तो लिफ्ट में फंसा व्यक्ति इंटर कॉम की मदद ले सकता है। लिफ्ट में पीटीटी (प्रेस-टू-टॉक) का बटन होता है, जो सीधे सिक्योरिटी के मेन कंट्रोल रूम से जुड़ा होता है। इन सोसाइटी में लगे इंटरकॉम भी काम नहीं करता। इस तरह की कई समस्याएं सामने आती हैं।
  • कैमरे : अगर लिफ्ट में कैमरे लगे हुए हैं तो लिफ्ट में आने-जाने वाले व्यक्ति पर सिक्योरिटी कंट्रोल रूम की नजर 24 घंटे बनी रहती है। इससे हादसे के दौरान कर्मचारी तुरंत हरकत में आ सकते हैं। लेकिन शहर के अधिकतर लिफ्ट में कैमरे लगे नहीं हैं या लगे हैं तो खराब पड़े हुए हैं।
  • सिक्योरिटी गार्ड : मानकों के मुताबिक लिफ्ट के पास नीचे व सबसे ऊपरी तल पर सिक्योरिटी गार्ड होना चाहिए। इस नाम पर भी रेजिडेंट्स से मेंटेनेंस चार्ज भी लिया जाता है, लेकिन सोसाइटी के नीचे टावर में गार्ड तो होते है ऊपरी तल पर कोई गार्ड नहीं होता है। 
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बहुमंजिला इमारतों में रहने वाले लोगों को डराने लगी है लिफ्ट

नोएडा। लिफ्ट गिरने से महिला की मौत के बाद शहर के निवासियों में गुस्से का माहौल है। कई बार निवासी लिफ्ट एक्ट को लागू करने की मांग कर चुके हैं। बहुमंजिला इमारतों में रहने वाली शहर की एक तिहाई से अधिक की आबादी अपनी सोसाइटी में लगी लिफ्ट से डरने लगी है। सोसाइटी में लगी लिफ्ट कब खराब हो जाए, कब इसमें कोई फंस जाए। यह कहना मुश्किल है।

बृहस्पतिवार को सेक्टर-137 पारस टियरा में हुई घटना के कारण लिफ्ट की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। हर महीने औसतन छोटी बड़ी 50 से अधिक शिकायतें आ रही है। वहीं बिल्डर व एओए मेंटेनेंस चार्ज के नाम पर रेजिडेंट से प्रीपेड चार्ज ले रहे हैं और लिफ्ट मेंटेनेंस का काम ठीक तरीके से नहीं कर रहे हैं। बहुमंजिला इमारतों में लगी लिफ्ट सोसाइटी के लोगों की लाइफलाइन होती है।

इसके लिए सोसाइटी में मेंटेनेंस शुल्क भी लिया जाता है। इसके बाद भी नोएडा व ग्रेनो में लोग रोजाना लिफ्ट में फंस रहे हैं। लिफ्ट गिरने से लेकर आग लगने की भी घटनाएं हो रही हैं। सोसाइटी में रहने वाले लोगों का आरोप है कि बिल्डरों ने अच्छी क्वालिटी की न तो लिफ्ट लगाई न ही मानकों के साथ आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया। इस कारण लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी सोसाइटी के लोग असुरक्षित हैं। रेजिडेंट ने इनकी कई बार प्राधिकरण व डीएम से शिकायत की है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। 
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