नई दिल्ली। त्रिवेणी कला संगम में शुक्रवार को प्राचीन कला केंद्र चंडीगढ़ द्वारा आयोजित 29वीं तिमाही बैठक में संगीत और नृत्य की अनूठी प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ हर्षित ने राग बागेश्री से किया। पारंपरिक आलाप, जोड़-झाला और छंदों से सजी उनकी प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब सराहा। इसके बाद हैदराबाद की प्रसिद्ध कुचिपुड़ी गुरु वी पद्म कल्याण की शिष्याओं ने दशावतार शब्दम् की नृत्य प्रस्तुति से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। साथ ही कालिया मर्दनम, मरकथा मणिमय और मंदोधरी शब्दम् जैसे पौराणिक कथाओं पर आधारित नृत्यांकों ने दर्शकों को भारतीय संस्कृति की समृद्धता और कलात्मकता का अनुभव कराया। शाम भर चली इन प्रस्तुतियों ने त्रिवेणी कला संगम को एक जीवंत सांस्कृतिक मंच में बदल दिया। समापन पर सभी कलाकारों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। संवाद