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Jammu Kashmir: किश्तवाड़ के गांधारी गांव में धू-धूकर जले 22 मकान, दुर्घटना में 85 लोग हुए बेघर

Fri, 28 Oct 2022 09:20 AM IST
आकाश दुबे अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

गांव में रात करीब एक बजे आग भड़की। दूरदराज का पहाड़ी इलाका और सड़क संपर्क न होने के कारण मौके पर दमकल विभाग नहीं पहुंच सका। स्थानीय लोगों ने ही आग पर काबू पाने का प्रयास किया, लेकिन कामयाबी नहीं मिल सकी।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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उपमंडल पाडर के दूरदराज पहाड़ी इलाके तुन पंचायत के चग-गांधारी गांव में वीरवार रात को आग लगने से 22 घर जल कर राख हो गए हैं। इस घटना ने लगभग 85 लोगों को बेघर कर दिया। लोगों ने दमकल विभाग को बुलाने की कोशिश की, लेकिन गांव के लिए सड़क न होने के कारण गाड़ियां आ न सकीं। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है। जिला प्रशासन की ओर से सहायता भेजी जा रही है।

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जानकारी के अनुसार गांव में रात करीब एक बजे आग भड़की। दूरदराज का पहाड़ी इलाका और सड़क संपर्क न होने के कारण मौके पर दमकल विभाग नहीं पहुंच सका। स्थानीय लोगों ने ही आग पर काबू पाने का प्रयास किया, लेकिन कामयाबी नहीं मिल सकी। सूचना मिलने पर सेना, पुलिस व पाडर के कई गांवों के लोग मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक सभी मकान जल कर राख हो चुके थे।

हालांकि, इस घटना में किसी को जान का नुकसान नहीं हुआ, क्योंकि समय रहते सभी लोग घरों से बाहर निकल गए थे। आग ने करोड़ों की संपत्ति को जला कर राख कर दिया है। स्थानीय सरपंच के अनुसार गांव में 22 मकान जल गए हैं, जिनमें लगभग 85 लोग रहते थे। मकानों में रखा सारा सामान जल गया है।
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हालांकि, लोगों को समय रहते बचा लिया गया। सेना ने सुबह पहुंचते ही घायल लोगों को उपचार प्रदान किया। साथ ही लोगों को राशन भी मुहैया करवाया। इसके अलावा जिला प्रशासन ने रेड क्रॉस सोसाइटी की तरफ से सहायता भेज दी है।

प्रशासन की ओर से चार लाख 60 हजार रुपये नकद, राशन और कपड़े भेजे गए हैं। आग लगने से 22 मकान जले हैं। इनमें स्थानीय निवासी केहर सिंह, रूप सिंह, मान सिंह, बीर सिंह, शादी लाल, मेजर सिंह, हरी सिंह, जानकी नाथ, सुभाष चंद्र, पनराज, बिबदेई, गुड्डी देवी, शाम सिंह, सरला देवी, अमी देवी, राज किशोर, सुमन किशोर, संजय कुमार, अंकुर कुमार, हरनाम सिंह, मोहिंद्र सिंह और जान सिंह के घर हैं। इसकी सूची स्थानीय सरपंच ने उपायुक्त को भेजी है।

हिमाचल प्रदेश की सीमा पर स्थित है गांधारी

गांधारी इलाका पाडर का सबसे दूर का इलाका है, जो हिमाचल प्रदेश की सीमा पर स्थित है। यहां के लिए पहले संसारी नाला तक वाहन से जाना होता है। उसके बाद पहाड़ी चढ़ते हुए लगभग 3 से 4 घंटे तक पैदल चलना पड़ता है। आने वाले दिनों में बर्फबारी होने वाली है। इसलिए, वहां के लोग जलाने के लिए सूखी लकड़ी, मवेशियों के लिए घास व अन्य सामान एकत्र करते हैं। लोगों में बातचीत थी कि गैस सिलिंडर में आग लगने से मकानों में आग लगी। हालांकि, इसकी किसी ने पुष्टि नहीं की है।

सड़क न होने से दमकल का पहुंचना कठिन

किश्तवाड़ में अधिकतर इलाके पहाड़ी हैं। इनमें से कुछ बिना सड़कों के हैं, जहां दमकल का पहुंचना भी कठिन है। बिना सड़क के वाहन वहां जा ही नहीं सकते। इतना ही नहीं, दूरदराज के गांव सभी एक दूसरे से सटे होते हैं। ऐसे में कभी एक घर में आग लगती है तो वह पूरा गांव चपेट में आ जाता है। इसी प्रकार मढ़वा, दच्छन, बोंजवा और पाडर में कई गांव पहले भी जल चुके हैं।
  

आग लगने की घटना बहुत दुखद है। इसके कारणों का पता नहीं चला है। हमने प्रशासन की टीमें भेज दी हैं, और बेघर हुए लोगों के लिए राहत सामग्री भी भेज दी है। - डॉ. देवांश यादव, उपायुक्त, किश्तवाड़

बहुत पीड़ा हुई जब गांधारी में आग लगने की घटना की जानकारी मिली। हम हर संभव सहायता दिलवाएंगे। इस संबंध में एलजी मनोज सिन्हा से भी संपर्क किया जा रहा है। - सुनील कुमार शर्मा, पूर्व मंत्री

 

तहसीलदार, थाना प्रभारी को घटना स्थल पर सुबह ही भेज दिया था। पूरे पाडर उपमंडल में इस घटना को लेकर सभी दुखी हैं। हर एनजीओ बेघर हुए लोगों की सहायता के लिए आम जनता से गुहार लगा रहा है। - डॉ. ऋषि शर्मा, एसडीएम, पाडर

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