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दिल्ली: हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है 14वीं सदी की खिड़की मस्जिद, जानें जब हिंदुओं ने इसके अस्तित्व की रक्षा

Sun, 20 Mar 2022 10:27 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली 

सार

दिल्ली के खिड़की गांव में हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक खिड़की मस्जिद स्थित है। मस्जिद का निर्माण फिरोज शाह तुगलक के प्रधानमंत्री जुनान शाह ने कराया था। उस समय यहां नियमित रूप से मुस्लिम आबादी नमाज पढ़ती थी। 1947 के बंटवारे के समय हालात बदले और मस्जिद पर खतरा मंडराने लगा। तब इलाके की हिंदू आबादी ने इसकी रक्षा की। फिलहाल एएसआई इसकी देखरेख कर रही है। 
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खिड़की मस्जिद - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दक्षिणी दिल्ली के खिड़की गांव में 14वीं शताब्दी की मस्जिद वर्षों से हिंदू आबादी के बीच बिल्कुल महफूज है। देश के बंटवारे के वक्त खिड़की गांव मुस्लिम आबादी से करीब खाली हो गया था। बाद में यहां हिंदू आबादी बसी, लेकिन इस विरासत मस्जिद को किसी ने नुकसान नहीं पहुंचने दिया। यह विरासत मस्जिद अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की देखरेख में है।

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खिड़की मस्जिद का निर्माण फिरोज शाह तुगलक के प्रधानमंत्री जुनान शाह ने कराया था। यहां तब नियमित रूप से स्थानीय मुस्लिम आबादी नमाज पढ़ती थी। बंटवारे के वक्त एक समय ऐसा आया जब खिड़की मस्जिद के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा। लेकिन उस समय इलाके के हिंदुओं ने मस्जिद के अस्तित्व को बचाने में सहयोग किया। विभाजन और उस दौरान भड़के सांप्रदायिक दंगों के वक्त खिड़की गांव मुसलमानों से करीब खाली हो गया था। तब बंटवारे के पाकिस्तान से भी भारी संख्या में हिंदू शरणार्थी दिल्ली आए।

खिड़की गांव के स्थानीय लोगों ने खिड़की मस्जिद को नुकसान पहुंचाने के बजाय इसे शरणार्थी शिविर के रूप में परिवर्तित किया। खिड़की गांव की राजपूत, चौहान, ब्राह्मण और दलितों के साथ यहां पर बची हुई मुस्लिम आबादी ने सालों तक खिड़की मस्जिद के अस्तित्व को बचाने में सहयोग किया। 

अब एएसआई कर रहा मस्जिद की देखरेख

खिड़की मस्जिद अब एक घरोहर स्थल है, इसकी देखरेख एएसआई कर रहा है। मस्जिद के चारों तरफ लोहे की ग्रिल लगी है, अब इसकी सुरक्षा पुख्ता है। मस्जिद की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों ने बताया कि यहां नमाज नहीं होती, लेकिन इसे देखने के लिए आने वालों के लिए यह जगह खुली है।

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