मायाकुंड स्थित जिस जनार्धन आश्रम में बुधवार को संपत्ति को लेकर विवाद हुआ, जो हमले में तब्दील हुआ। वह आश्रम करीब 100 वर्ष पुराना है, यहां शुरूआत में सिर्फ दंडी स्वामी ही रहा करते थे। इनके दर्शकों के लिए दूर दराज से श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते थे।
यही कारण है कि इस आश्रम को दंडी बाड़ा के रूप में पहचान मिली और इसी नाम से यह विश्व में विख्यात हो गया। इसके बाद ब्रह्मलीन ज्योतिष्ठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी माधवाश्रम महाराज ने इसे जनार्धन आश्रम का नाम दिया। बुधवार को हमलावरों के हमले का शिकार हुए आश्रम संचालक स्वामी विज्ञानानंद तीर्थ तथा प्रबंधक केशव स्वरूप ब्रह्मचारी दोनों ही ब्रह्मलीन शंकराचार्य के ही शिष्य हैं।
गुरु पूर्णिमा पर पादुका पूजन को आए थे युवक
प्रत्यक्षदर्शी अजय शर्मा और सन्नी ने बताया कि चारों युवक स्वामी विज्ञानानंद तीर्थ से बहुत तेज आवाज में बात कर रहे थे। तभी एक युवक ने चाकू निकालकर हमला कर दिया। यह चारों गुरु पूर्णिमा पर पादुका पूजन के लिए आश्रम में आए थे। हमलावरों का पूर्व में भी आश्रम में आना जाना रहा है। खबर लिखे जाने तक पीड़ित पक्ष की ओर से कोई तहरीर पुलिस को नहीं सौंपी गई थी।