आर्थिक तंगी के कारण किसी भी नौनिहाल की पढ़ाई न छूटे, इसके लिए ग्राम बालूवाला में एक अनोखी और प्रेरक पहल की जा रही है। यहां अध्यापिका शिखा चंदेल पिछले सात महीने से अपने घर पर एकल विद्यालय का संचालन कर रही हैं। वह न सिर्फ बच्चों को निशुल्क शिक्षा दे रही हैं, बल्कि उन्हें स्वास्थ्य और भारतीय संस्कारों से भी मजबूती से जोड़ रही हैं। रोजाना शाम के समय करीब 30 बच्चे शिखा के घर पहुंचते हैं, जहां वे तीन घंटे पढ़ाई करते हैं। इस विद्यालय की सबसे खास बात यह है कि यहां किताबी ज्ञान के साथ शारीरिक और मानसिक विकास पर भी पूरा जोर दिया जा रहा है। बच्चों को नियमित रूप से व्यायाम कराया जाता है। व्यायाम को उबाऊ होने से बचाने और रोचक बनाने के लिए, इसके विभिन्न चरणों को गीतों के माध्यम से सिखाया जाता है। इससे बच्चे खेल-खेल और मनोरंजन के साथ शारीरिक गतिविधियों में पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लेते हैं।अध्यापिका शिखा चंदेल का मानना है कि नियमित व्यायाम से बच्चों में शारीरिक सक्रियता, अनुशासन और एकाग्रता बढ़ती है। इसके अलावा, बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़े रखने के लिए नियमित रूप से रामायण की चौपाई और भजन भी सिखाए जाते हैं। शिखा का एकमात्र उद्देश्य है कि ये बच्चे अभावों को पीछे छोड़कर बेहतरीन शिक्षा और संस्कार ग्रहण करें, ताकि भविष्य में वे सफलता के शिखर पर पहुंचकर अपने परिवार व देश का नाम रोशन कर सकें।