वैश्विक महामारी कोरोना से बचाव के लिए जारी लॉकडाउन और सर्दियों के सीजन में हुई भारी बर्फबारी ने राज्य पक्षी मोनाल को नया जीवन दिया है। मध्य हिमालय के चोपता से तुंगनाथ क्षेत्र में इन दिनों यह पक्षी समूह में विचरण करता नजर आ रहा है। बीते ढाई दशकों में यह पहला मौका है, जब मोनाल समूह में विचरण करते दिख रहे हैं।
पक्षी विशेषज्ञों व वन विभाग के अधिकारियों ने इसे प्रकृति के लिए सुखद बताते हुए कहा कि इन दिनों इस पक्षी का प्रजजन काल है, जिससे आने वाले दिनों में इसके परिवार में और अधिक बढ़ोत्तरी की उम्मीद है। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए बीते 25 मार्च से जारी लॉकडाउन के कारण रुद्रप्रयाग जनपद के मिनी स्विट्जरलैंड कहे जाने वाले चोपता, बनियाकुंड और दुगलबिट्टा से लेकर तुंगनाथ, चंद्रशिला समेत अन्य बुग्याली क्षेत्रों में मानवीय हलचल भी ठप है, जो मोनाल के लिए वरदान साबित हो रहा है।
इन दिनों यहां नर मोनाल समूह में विचरण कर रहे हैं । इसका प्रजनन काल मार्च से जून तक होता है। जो इनकी वंश वृद्धि के लिए सुखद है। समुद्रतल से दो से तीन हजार मीटर की ऊंचाई पर पाया जाने वाला मोनाल पक्षी प्रजातियों में सबसे सुंदर पक्षी है। पश्चिमोत्तर हिमालय क्षेत्र में इसे मन्याल, रतनल, रत्काप, मुनाल, घुर मुनाल, रतुया, कांवा आदि नाम से जाना जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम लेफोफोरस इंपेजिनस है।
वर्ष 2008 के बाद नहीं हुई गणना
नवंबर 2000 में उत्तराखंड राज्य बनने के बाद वन्य जीव संरक्षण बोर्ड ने वर्ष में मोनाल की गणना की थी। तब, राज्य में 919 मोनाल पाए गए थे, जिसमें सबसे अधिक केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग में 367 पक्षी देखे गए थे, लेकिन इसके बाद बीते 12 वर्षों से राज्य पक्षी की दोबारा गणना नहीं हो पाई है।
मैं ढाई दशक से चोपता, तुंगनाथ क्षेत्र में नियमित आवागमन करता आ रहा हूं। यह पहला मौका है, जब मुझे चोपता में ही मोनाल समूह में विचरण करते हुए मिला है। लॉकडाउन ने इस दुर्लभ श्रेणी के सुंदर पक्षी को नया जीवन दिया है।
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यशपाल सिंह नेगी, वरिष्ठ पक्षी विशेषज्ञ
लॉकडाउन के दौरान बुग्यालों में मानवीय हस्तक्षेप नहीं होने से यहां प्रवास करने वाले पशु-पक्षी स्वच्छंद हैं। मोनाल का समूह में विचरण करने का अर्थ है कि इसके वंश में वृद्धि हो रही है।
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अमित कंवर, डीएफओ केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग गोपेश्वर/चमोली
आने वाले दिनों में मोनाल की संख्या में काफी वृद्धि की उम्मीद है। यह समय कई पक्षी-पशु प्रजातियों के वंश वृद्धि में भी मददगार साबित हो रहा है। इसे देखते हुए वन विभाग को ठोस योजना बनानी होगी।
- जगत सिंह जंगली, पर्यावरणविद्