डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन उत्तराखंड ने लंबित मांगों को लेकर आंदोलन के तीसरे चरण के तहत दूसरे दिन भी सुबह आठ से 10 बजे तक दो घंटे कार्य बहिष्कार किया। इसके बाद विरोध स्वरूप काली पट्टी बांधकर काम किया।
इस कार्य बहिष्कार में उत्तराखंड के फार्मासिस्ट एवं संवर्ग के अधिकारी शामिल हैं। कार्य बहिष्कार के कारण मरीज परेशान हो रहे हैं। मरीजों को उपचार तो मिल गया, लेकिन दवा के लिए भटकना पड़ा। जिला अध्यक्ष चंद्र मोहन सिंह राणा ने बताया कि प्रदेशभर के डिप्लोमा फार्मासिस्ट बीती 24 अप्रैल से लंबित मांगों की पूर्ति के लिए चरणबद्ध आंदोलन कर रहे है, लेकिन सरकार की ओर से कोई आश्वासन नहीं मिल रहा है। ऐसे में संगठन को बाध्य होकर तीसरे चरण का आंदोलन शुरू करते हुए कार्य बहिष्कार करना पड़ रहा है। इस दौरान जिला मंत्री उर्मिला द्विवेदी, प्रांतीय उपाध्यक्ष सीएल भट्ट, डीपीओ डीएस नेगी शामिल हैं।
ये हैं मांगें
- आईपीएचएस मानक में कम हो रहे पदों में बढ़ोतरी की जाए।
- अस्थगित 63 पद क्रियाशील किए जाएं।
- सेवा नियमावली, काउंसिल का गठन किया जाए।
- 119 पदों पर पद स्थापना के लिए फार्मासिस्टों के विकल्प के लिए शासनादेश जारी हो।
- 10 वर्ष की सेवा पर पहली एसीपी दी जाए।
- 2004 के बाद के फार्मासिस्टों को पुरानी पेंशन का लाभ दिया जाए।