आरोपी उन्हें छोटी जाति का बताकर हाथ से पानी न पीने आदि की बात कहता रहा। इस अपमान के बाद भी वह ससुराल में रहती रही। ससुराल पक्ष के लोगों ने कुछ समय पहले पार्क रोड स्थित मकान को बेचकर उसे घर से निकाल दिया। मजबूरन उसे मायके जाकर विधवा मां का सहारा लेना पड़ा।
पीड़िता का आरोप है कि पति ने तलाक के लिए दबाव बनाने को उसकी मां को एक झूठे मुकदमे में जेल भिजवा दिया। परिवार न्यायालय ने उसकी अर्जी पर आरोपी को भरण-पोषण की धनराशि देने के आदेश दिए थे, लेकिन पूरी धनराशि समय से अदा नहीं की गई। न्यायालय ने आरोपी पति की तलाक की अर्जी को सही ना मानते हुए खारिज कर दिया था। इसके खिलाफ विनीत तिवारी ने हाईकोर्ट में अपील की है।
पीड़िता का आरोप है कि वह आठ जनवरी को मुकदमे की पैरोकारी में कचहरी आई थी। इसी दौरान आरोपी पति ने गाली-गलौज करते सरेआम उसे जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया है। मां आदि के लिए गंदे शब्दों का प्रयोग किया। सीओ सिटी शेखर सुयाल का कहना है कि विवेचना में आने वाले तथ्यों के आधार पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।