फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चप्पा चप्पा हरा करेंगे, हरियाली से धरा भरेंगे के नारों के साथ निकाला स्वागत मार्च

विज्ञापन
विज्ञापन
सामाजिक संस्था धाद और अमर उजाला के संयुक्त त्वावधान में आयोजित स्वागत मार्च के साथ हरेला महापर्व और घी संग्रांद का आगाज हो गया। स्वागत मार्च में शामिल लोगों ने चप्पा-चप्पा हरा करेंगे, हरियाली से धरा भरेंगे सुनो हरेला का संदेश, हरा भरा हो मेरा देश, क्या हैं, जंगल के उपकार, मिट्टी पानी और बयार आदि के नारों से राजधानी की सड़कें गूंज उठी।
विज्ञापन

हरेला पर्व को मनाने देहरादून की सड़कों पर जब आम शहिरयों संग स्कूली छात्र हरेला स्वागत मार्च निकाला तो लोगों ने भरपूर स्वागत किया। स्वागत मार्च में शामिल लोगों ने थड़िया, चौंफला नृत्य करने के साथ ही मार्च में सांस्कृतिक कर्मी, कई सामाजिक संगठन और आम नागरिक भी शामिल हुए। पद्मश्री माधुरी बड़थ्वाल ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। स्वागत मार्च डोभालवाला के इंटर कॉलेज से नेशविला रोड, गांधी पार्क होते हुए घंटाघर तक निकाला गया। मार्च में धाद संस्था के तमाम पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं के अलावा छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। इस मौके पर मुख्य अतिथि माधुरी बड़थ्वाल ने कहा कि लोक संस्कृति की ताकत को पहचानना जरूरी है। इसमें सदियों की परंपरा निहित है।
कहा कि धाद ने हरेला में लोक संस्कृति को आधार बनाकर पहल की। यही कारण है कि आज हरेला का फैलाव व्यापक हो गया है। प्रधानाचार्य सुरेंद्र सिंह बिष्ट ने कहा कि हरेला को स्कूलों के रास्ते जीवन में ले जाने का प्रयोग सराहनीय है, क्योंकि इससे नई पीढ़ी को हम उनके समाज और संस्कृति से परिचित करवाते हैं। कहा कि अगर सभी छात्र जन्मदिन पर पौधे लगाए और रक्षा करें तो नई दुनिया बन सकती है। धाद के महासचिव तन्मय मंमगाई ने कहा कि धाद के प्रयासों का परिणाम है कि आज इसे राजकीय पर्व के रूप में मान्यता मिल चुकी है। अब समय आ गया है कि हरेला प्रदेश से आगे निकलकर देश दुनिया में पहुंचे। अध्यक्ष लोकेश नवानी ने कहा कि हरेला पर्यावरण संरक्षण से बहुत आगे का विचार है और इसमें अंतरराष्ट्रीय अपील है। हरेला दुनिया का एकमात्र ऐसा महापर्व है, जहां पौधे लगाना संस्कृति का अभिन्न अंग है।
विज्ञापन

ये रहे मौजूद
अर्जुन सिंह नेगी, धन्यवाद रैली की संयोजक आशा डोभाल, नीना रावत, सुशील पुरोहित, प्रदीप कुकरेती, सतेंद्र भंडारी, प्रतीक पंवार, दयानंद डोभाल, मनोहर लाल, गणेशचंद्र उनियाल, विजय जुयाल, हर्षमणि व्यास, शांति प्रकाश, कल्पना बहुगुणा, मंजू काला, गणेश उनियाल, बृजमोहन उनियाल, साकेत रावत, सुशील पुरोहित, सोहनलाल अमोली, इंदू भूषण सकलानी, पुष्पलता मंमगाई, सविता जोशी, बीना कंडारी, कुलदीप कंडारी, तोताराम ढौंडियाल, सुदीप जुगरान, देवेंद्र जोशी, विनोद कुमार, शुभम, अर्चना ग्वाड़ी, स्वाति डोभाल, सुधा बहुखंडी, पिंकी बिष्ट, सारिका राणा, मुकेश आदि।
झुमैलो और थड्या लोकगीतों पर झूमे लोग
स्वागत मार्च के दौरान पद्मश्री माधुरी बड़थ्वाल ने अपने चिरपरिचित अंदाज में हरेला के झुमैलो और थड्या लोकगीतों को सुनाया। तुंगनाथ मंदिर में चौसठ ताल नौबत बजाने वाले ढोली ओंकारदास के पुत्र अखिलेश दास ने अपने ढोल की नाद के साथ वातावरण को हरेलामय कर दिया। इतना ही नहीं स्वागत मार्च में झुमैलो और थड्या नृत्य किया। बच्चों और आम नागरिकों ने अपने नारों से आम समाज को पर्यावरण संरक्षण उसकी उपयोगिता के प्रति जागरूक किया।
अन्न हिमालय का अपनाये में खाई झंगोरे की खीर
अन्न हिमालय का अपनाये के तहत कैफे रिसाइकिल की ओर से झंगोरे की खीर बच्चों को परोसी गई। कैफे की तरफ से स्वाति डोभाल ने बताया कि दूध और पर्वतीय अन्न झंगोरे के साथ बनाया जाने वाला यह भोजन स्वादिष्ट होने के साथ कम कैलोरी वाला भी है, इसलिए इसे लोग बहुत पसंद करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें