परिवहन निगम को ट्रांसपोर्ट नगर स्थित वर्कशॉप के लिए जमीन देने वाले सेवलां खुर्द के ग्रामीण मुआवजे के लिए भटक रहे हैं। उनका आरोप है कि निगम ने जमीन का अधिग्रहण किए बिना ही सीधे स्मार्ट सिटी को दे दी। मामले में परिवहन मंत्री चंदन रामदास ने विभागीय सचिव को परीक्षण के निर्देश दिए हैं।
सेवलां खुर्द निवासी जयपाल सिंह ने बताया कि उनके परिवार और कई ग्रामीणों से वर्ष 2003-04 में तीन-तीन हजार वर्ग मीटर जमीन ली गई थी, जिसका मुआवजा भी दिया गया था। इसके बाद आठ-आठ सौ वर्ग मीटर जमीन और ली गई, जिसका मुआवजा आज तक नहीं दिया गया। जमीन आज भी उनके ही नाम है। वर्ष 2012 में निगम ने दो पत्र डीएम को भेजे थे, जिस पर डीएम ने आपसी सहमति से अधिग्रहण की सलाह दी थी। उन्होंने बताया कि पहले सहमति बनी थी कि 25 हजार प्रति मीटर के हिसाब से मुआवजा मिलेगा। फिर सहमति बनी कि निगम इस आठ-आठ सौ वर्गमीटर जमीन के बदले सामने की ओर जमीन देगा। दोनों में ही निगम पलट गया। इस बीच निगम ने यह जमीन स्मार्ट सिटी के कार्यों के लिए दे दी। जमीन का न तो अधिग्रहण हुआ और न ही उन्हें मुआवजा मिला।
मामले में जयपाल सिंह ने परिवहन मंत्री चंदन रामदास को शिकायत की, जिसका संज्ञान लेते हुए उन्होंने मौके पर ही परिवहन सचिव अरविंद सिंह ह्यांकी को परीक्षण कर कार्रवाई के निर्देश दे दिए। निगम प्रबंधन का कहना है कि चूंकि यह आठ-आठ सौ वर्ग मीटर जमीन 2012 में ली गई थी, लिहाजा नियमानुसार उसी वक्त के सर्किल रेट और अब तक के ब्याज के हिसाब से निगम भुगतान को तैयार है। जमीन देने वाले ग्रामीण इस पर राजी नहीं हो रहे हैं।