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Dehradun News: टाउनशिप के लिए अधिकांश तैयार, एमडीडीए का हस्तक्षेप नहीं मंजूर

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I- नागथात में 40 गांवों के ग्रामीणों ने नए चकराता पर किया मंथन
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I- नई टाउनशिप के मसौदे के अध्ययन के बाद आगे की रणनीति तय करेंगे ग्रामीणI

तहसील क्षेत्र के नागथात में चकराता में नई टाउनशिप के संभावित प्रभाव को लेकर 40 गांवों के ग्रामीणों ने बैठक की। अधिकांश ग्रामीण नई टाउनशिप और क्षेत्र के विकास के पक्ष में नजर आए। हालांकि ग्रामीणों ने एक सुर में क्षेत्र को मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) में शामिल करने का विरोध किया। कहा कि नई टाउनशिप के मसौदे के अध्ययन के बाद वह आगे की रणनीति तय करेंगे।

चकराता में नई टाउनशिप के दायरे में आने वाले कालसी और चकराता तहसील क्षेत्र के गांवों के ग्रामीणों में असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। स्थानीय ग्रामीण नई टाउनशिप के भौगोलिक, सामाजिक, सांस्कृतिक प्रभाव और अपने हक हकूक को लेकर चिंतित थे। सोमवार विभिन्न मुद्दों को लेकर नागथात में 40 गांवों के लोगों ने गहन मंथन किया। ग्रामीणों ने कहा नई टाउनशिप का विरोध नहीं है। लेकिन जनजातीय क्षेत्र में एमडीडीए का हस्तक्षेप मंजूर नहीं है।
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लखवाड़ गांव निवासी जगमोहन सिंह चौहान ने कहा कि नई टाउनशिप बनाने पर कोई एतराज नहीं है। लेकिन एमडीडीए को क्षेत्र से बाहर रखा जाए। सावड़ा गांव निवासी सेवानिवृत कैप्टन मेहर सिंह चौहान और लक्सयार के गुमान सिंह ने कहा कि नई टाउनशिप का नहीं, केवल एमडीडीए के दखल का विरोध किया जा रहा है।

सीला गांव निवासी इंदर सिंह ने कहा कि जनजातीय क्षेत्र का विकास होना चाहिए। हम सभी विकास के पक्ष में है। लेकिन एमडीडीए से जनजातीय क्षेत्र का मूल ढांचा बिगड़ जाएगा। गडोल गांव के श्याम सिंह ने कहा कि एमडीडीए अगर क्षेत्र में आता है तो विरोध होगा। ग्राम बाढौ के पूर्व प्रधान सीताराम चौहान ने कहा कि टाउनशिप के मसौदे को मंगवाया जाए। इस पूरे मसौदे और योजना पर चर्चा की जरूरत है।



बैठक में खत बहलाड के अध्यक्ष मोहर सिंह चौहान, कुंदन सिंह चौहान, युद्धवीर सिंह, राजेंद्र सिंह, जगत सिंह, दिनेश सिंह, वीरेंद्र रावत, खेम सिंह, भोपाल सिंह आदि उपस्थित रहे।
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Iलोगों की सहमति से टाउनशिप होगी तैयार : नौटियालI



वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रामशरण नौटियाल ने कहा कि नई टाउनशिप को लेकर पूरे क्षेत्र में कोई विरोध नहीं है। 40 गांवों की बैठक से यह बात साफ हो गई है। कहा कि ग्रामीणों ने एमडीडीए के टाउनशिप से जुड़ने का विरोध किया है। कहा कि पहले विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (साडा) ग्रामीण क्षेत्र के लिए आवासीय और व्यवसायिक परियोजनाओं का खाका तैयार करता था। लेकिन अब साडा, एमडीडीए में मर्ज कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि फिलहाल एमडीडीए के अलावा सरकार के पास नई टाउनशिप को विकसित करने के लिए कोई और अथॉरिटी नहीं है। नौटियाल ने कहा कि अगर सरकार चकराता में नई टाउनशिप के लिए नई अथॉरिटी का गठन करती है तो उसका भी स्वागत किया जाएगा। लोगों के सुझावों के आधार पर ही मास्टर प्लान तैयार होगा। उनके लिए टाउनशिप से ऊपर जौनसार है।
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