विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ न होने के कारण विजिलेंस तकनीकी जांचों में पिछड़ रही है। विजिलेंस मुख्यालय ने विशेषज्ञों को शामिल करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा है। इससे विजिलेंस के पास लंबित जांचों का बोझ भी कम हो जाएगा। इसके साथ ही विजिलेंस ने कई और प्रस्ताव भी शासन को भेजे हैं।
विजिलेंस वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की जांच करती है। ज्यादातर मामले ऐसे होते हैं, जिनको पुलिस अधिकारी समझ नहीं पाते हैं। कंस्ट्रक्शन से संबंधित मामलों में इंजीनियर बैकग्राउंड के लोगों का होना बेहद जरूरी है। इसके अलावा बजट के मामलों में वित्तीय जानकारों की जरूरत भी विजिलेंस को महसूस हो रही है। विजिलेंस के अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, कार्यक्षमता को बढ़ाने के लिए विशेषज्ञों को शामिल करने के लिए अब शासन को भेजा गया है।
सूत्रों के मुताबिक, इसके तहत इंजीनियर बैकग्राउंड के लोगों को शामिल करने की बात चल रही है। नियमित रूप से न हो सके तो विजिलेंस किसी एजेंसी को भी हायर कर सकती है। बता दें कि कई मामलों की जांच सिर्फ विशेषज्ञ न होने के कारण लंबित है। ऐसे में यदि विजिलेंस को विशेषज्ञ मिल जाते हैं तो जांचों में तेजी आएगी।
राजस्थान, गुजरात की तर्ज पर फोन टेप करना चाहती है विजिलेंस
विजिलेंस ने भ्रष्टाचार के मामलों में बिचौलियों के फोन टेप करने की अनुमति भी शासन से मांगी है। इसके लिए भी पिछले दिनों प्रस्ताव भेजा गया है। विजिलेंस सूत्रों के अनुसार, राजस्थान और गुजरात की विजलेंस को फोन टेप करने का अधिकार है। इसके लिए केंद्र के टेलीग्राफ एक्ट के प्रावधानों को आधार बनाया गया है। इस एक्ट के तहत अपराध की रोकथाम के लिए बिचौलियों और संदिग्ध अपराधियों के फोन टेप किए जा सकते हैं। राजस्थान में इस तरह का अधिकार मिलने के बाद बड़े भ्रष्टाचारियों पर नकेल कसी जा सकी है।