आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में घिरीं पीसीएस अधिकारी निधि यादव के खिलाफ शासन ने विजिलेंस जांच के आदेश दिए हैं। उनके खिलाफ विजिलेंस पहले ही एक गोपनीय जांच कर रिपोर्ट शासन को भेज चुकी है। इसके बाद उनकी खुली जांच के आदेश दिए गए हैं। यह जांच विजिलेंस के देहरादून सेक्टर में की जाएगी।
निधि यादव 2005 बैच की पीसीएस अधिकारी हैं। उन्होंने तब से अब तक कई महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। मगर, समय-समय पर उन पर कई तरह के आरोप लगे जिनसे वह अक्सर विवादों में रहीं। पिछले साल उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप लगे थे। इसके बाद शासन ने उनकी गोपनीय जांच करने के आदेश दिए थे। विजिलेंस ने उनकी नियुक्तियों के स्थानों पर जाकर जांच की। बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में भी कुछ संपत्तियों को लेकर जांच की गई।
इस मामले में विजिलेंस ने पिछले दिनों अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दी थी। अब शासन ने इसके आधार पर पीसीएस निधि यादव के खिलाफ खुली जांच के आदेश दिए हैं। निदेशक विजिलेंस अमित सिन्हा ने बताया, निधि यादव के खिलाफ गोपनीय जांच रिपोर्ट शासन को सौंपने के बाद खुली जांच की अनुमति मांगी गई थी। शासन ने अनुमति दे दी है। यह जांच विजिलेंस के देहरादून सेक्टर को भेजी गई है। जांच में आरोपों की पुष्टि हुई तो अग्रिम कार्रवाई के तहत मुकदमा दर्ज करने की अनुमति भी मांगी जाएगी। फिलहाल, किन-किन संपत्तियों की जांच होनी हैं, कहां-कहां ये संपत्तियां हैं, इसका खुलासा नहीं किया जा सकता है।
रुक गई थी निधि यादव की पदोन्नति
पीसीएस निधि यादव को वरिष्ठता के आधार पर इस साल प्रमोशन का लाभ मिल जाना था। वह इस साल आईएएस बन जातीं। शासन ने वरिष्ठता के आधार पर उनके प्रमोशन के लिए फाइल भी बढ़ा दी थी। लेकिन, जांच के दायरे में आने से ऐन वक्त पर उनकी डीपीसी पर रोक लगा दी गई। इससे वह इस साल भी पदोन्नति से रह गईं।
मैं जांच में पूरा सहयोग करूंगी। मगर, जो व्यक्ति मुझ पर 100 करोड़ रुपये की संपत्तियां अर्जित करने का आरोप लगा रहा है उससे साक्ष्य मांगे जाएं। मैं जिन-जिन विभागों में रही हूं, आज तक मेरे खिलाफ भ्रष्टाचार के कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं। अब प्रमोशन के वक्त आकर इस तरह की बातें की जा रही हैं। यह एक तरह से उत्पीड़न है। यदि मेरे खिलाफ कोई साक्ष्य मिलता है तो सरकार मुझे बर्खास्त करे। इसके लिए पूरी तरह से तैयार हूं।
-निधि यादव, पीसीएस अधिकारी