सीमांत जिले उत्तरकाशी के सर्वाधिक दुर्गम मोरी ब्लाॅक में अमर उजाला फाउंडेशन की पहल पर स्वास्थ्य शिविर लगे तो 15-15 किमी तक पैदल चलकर सैकड़ों ग्रामीण इलाज कराने पहुंचे। शिविर में उन्हें मुफ्त इलाज और दवाएं दी गईं। चार दिन में 1560 लोगों ने अपना इलाज कराया। इलाज कराने पहुंचे ग्रामीणों का कहना था कि जिले के इन दुर्गम और पिछड़े क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं सहज उपलब्ध नहीं है। जिले के सीमांत गांवों के लोगों को इलाज के लिए 60 से 80 किमी तक जाना पड़ता है। इसमें से 20 किमी तक उन्हें पैदल चलना पड़ता है।
अमर उजाला फाउंडेशन ने महंत इन्दिरेश अस्पताल के साथ मिलकर सीमांत गांवों में चार दिन तक स्वास्थ्य शिविर लगाए। सबसे पहला शिविर मोरी ब्लाॅक जीआईसी दौंणी में लगा। इसके बाद जीआईसी जखोल, सांकरी और आराकोट में चिकित्सा शिविर लगाए गए। इन चारों शिविरों में 1343 लोगों ने स्वास्थ्य परीक्षण कराया। िशविरों में इलाज के लिए स्थानीय ग्रामीणों में उत्साह देखते ही बना।
जिले की गंगा घाटी में ग्राम पंचायत मनेरी, लौंथरू बयाणा, सैंज, सौरा गांव में मेडिकल कैंप आयोजित हुए। इनमें 217 ग्रामीणों ने स्वास्थ्य जांच कराई। इस दौरान उन्हें निशुल्क जांचों संग मुफ्त दवाइयां भी दी गई। ओसला गंगाड़ सहित ढाटमीर, पवाणी गांव से कैंप पहुंचे ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें जांच कराने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचने के लिए उन्हें पैदल और मुख्य मार्ग के जरिये 50 किमी का फासला तय करना पड़ता है। शिविरों में ईसीजी, शुगर, बीपी व ब्लड से संबंधित जांचें निशुल्क उपलब्ध होने से वे काफी खुश और उत्साहित दिखे।
जोड़ों के दर्द और बुखार से पीड़ित थे ग्रामीण
चिकित्सकों के मुताबिक, यहां अधिकांश ग्रामीणों में जोड़ों के दर्द, खांसी, बुखार, पेट व आंखों से संबंधित दिक्कतें देखने को मिलीं। सांकरी में आर्थोपैडिक सर्जन डॉ अभिषेक, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ आदिति, नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ आकाश ने मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। क्षेत्र में बुखार और खांसी के सबसे अधिक मरीज देखने को मिले।