दोनों नहरों से बिजनौर के करीब एक दर्जन गांवों में भी खेती के लिए सिंचाई होती है। मालन साइफन से लेकर कण्वाश्रम तक के डेढ़ किमी नहर मलबे से पट गई है, वहीं करीब 40 मीटर का हिस्सा मालन नदी की ओर से हुए कटाव से ध्वस्त हो गई है। मालिनी किसान पंचायत के अध्यक्ष जेपी बहुखंडी और महासचिव मधुसुदन नेगी ने शासन और प्रशासन के साथ ही सिंचाई विभाग से क्षतिग्रस्त नहर की जल्द सुध लेकर उसके बचाव के लिए काम करने की मांग की है।
13 अगस्त की आपदा की चपेट में आने से करीब 1200 मीटर मुख्य मालन नहर मलबे से पट गई है। 40 मीटर का हिस्सा भूकटाव के कारण क्षतिग्रस्त हो गया है। उच्चाधिकारियों को वस्तु स्थिति से अवगत कराया गया है। नहर की मरम्मत और बाढ़ से बचाव के लिए आगणन तैयार किया जा रहा है।
-विनोद कुमार, सहायक अभियंता सिंचाई खंड दुगड्डा।