बारिश और भूस्खलन से पिथौरागढ़ जिले के सीमांत इलाकों में हालात खराब हैं। धापा, टांगा समेत तमाम गांवों में बेघर हुए लोग पुनर्वास की आस लगाए हुए हैं। इधर मदकोट को जोड़ने वाले दो पुल टूटने से मदकोट कस्बे में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति ठप पड़ गई है। दुकानों से आटा, चीनी और प्याज गायब हो गया है। यहां 35 रुपये किलो वाला चावल 70 रुपये में मिल रहा है तो एक दर्जन केला भी शतक लगाने लगा है।
मुनस्यारी-मदकोट सड़क पर स्थित पुल 18 जुलाई की रात आई बारिश से बह गया था। मुनस्यारी रूट से ही मदकोट के लिए सामान की सप्लाइ हो रही थी। 27 जुलाई को जौलजीबी-मदकोट को जोड़ने वाला चामी पुल भी बह गया। तब से मदकोट कस्बा अलग-थलग पड़ा हुआ है। दोनों ओर से रास्ते बंद होने से क्षेत्र के लिए राशन सहित अन्य जरूरी सामान की सप्लाई बंद हो गई।
कस्बे की किसी भी दुकान पर आटा, चीनी और प्याज नहीं है। कुछ दुकानदारों ने मजदूरों के जरिये मुनस्यारी से सामान ढुलान किया। इसमें अधिक लागत आने से 35 रुपये किलो वाले चावल के दाम बढ़कर 70 रुपये प्रति किलो पहुंच गए हैं। नमक का 15 रुपये वाला पैकेट 20 रुपये में मिल रहा है। केला 50 रुपये से बढ़कर 100 रुपये दर्जन हो गया है। सेब 200 रुपये किलो बिक रहा है। शीघ्र पुल नहीं बनने की स्थिति में हालात और खराब होने की आशंका है।
मंडलायुक्त ने सुनीं आपदा पीड़ितों की पीड़ा
कुमाऊं आयुक्त अरविंद सिंह ह्यांकी ने बुधवार को मुनस्यारी में आपदा से हुई क्षति के बाद चलाए जा रहे राहत और बचाव कार्यों के साथ ही पुनर्निर्माण के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने आपदा प्रभावित गांवों का दौरा किया। राहत शिविरों में रह रहे आपदा प्रभावितों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने अधिकारियों को पीड़ितों के पुनर्वास के लिए प्रस्ताव बनाने, राहत का वितरण करने को कहा। उन्होंने कहा कि खतरे की जद में आए आपदा प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए भूगर्भीय सर्वेक्षण किया जा रहा है। विभागों के चीफ इंजीनियर पुनर्निर्माण कार्यों पर नजर रखेंगे।