मौसम का यही मिजाज रहा तो दिसंबर में भी मास्टर प्लान के कार्य जारी रखे जाएंगे। बदरीनाथ धाम से करीब 15 किमी दूर सतोपंथ ट्रेक पर भी बर्फ के दर्शन कम ही हो रहे हैं। जबकि गत वर्षों तक 20 नवंबर के बाद बारिश और बर्फबारी होने से यहां निचले क्षेत्र तक बर्फ जम जाती थी।
यही स्थिति हेमकुंड साहिब में भी बनीं हुई है। गोविंदघाट गुरुद्वारे के वरिष्ठ प्रबंधक सरदार सेवा सिंह ने बताया कि हेमकुंड साहिब में पहली बार शीतकाल में बर्फ के दर्शन नहीं हो रहे हैं। हेमकुंड साहिब की पवित्र झील ठंड से जम गई है, लेकिन पहाड़ियों में बर्फ नहीं है।
बदरीनाथ के पूर्व धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल का कहना है कि बदरीनाथ धाम में अभी तक बर्फबारी न होना चिंतनीय है। पिछले चार माह से बारिश, बर्फबारी नहीं हुई है। धाम में बर्फबारी होने से मौसम में भी निखार आ जाता है।