थराली की पिंडर घाटी में दोपहर बाद गर्जना व तेज हवाओं के साथ हुई बारिश से खेतों में खड़ी फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है। ऊपरी क्षेत्रों में लगातार बिजली चमकने और तेज बारिश से लोग परेशान हैं। पिछले एक सप्ताह से हर रोज दोपहर बाद तेज बारिश हो रही है। कृषक बलवंत सिंह, भीम सिंह, भरत सिंह चंद्रबल्लभ, शरद भूषण ने कहा कि खेतों में रात दिन काम करने के बाद जो फसल पैदा हुई वह बारिश ने खराब कर दी। इससे उनको आर्थिक नुकसान हुआ है।
टिहरी में चार संपर्क मार्गों पर यातायात बाधित
टिहरी जिले के ग्रामीण संपर्क मार्गों पर बारिश की मार भारी पड़ रही है। अलग-अलग क्षेत्रों के चार ग्रामीण सड़क बारिश से यातायात के लिए पिछले एक सप्ताह से बंद चल रही है। नवनिर्मित चल्ड -कुखई मोटर मार्ग पर पहाड़ी से बार-बार पत्थर गिरने से मार्ग पर यातायात बंद करना पड़ रहा है। यही स्थिति गुलर-नाई-मीणाथ सड़क मार्ग की भी बनी हुई है।
बारिश से चल्ड-कुखई, फकोट-कड़ाकोट, हिंडोलाखाल-सोनी, गुलर-नाई-मीणाथ मोटर मार्ग पर अलग-अलग स्थानों पर मलबा और पत्थर गिरने से वाहनों का संचालन नहीं हो पा रहा है। लोनिवि के अधीक्षण अभियंता एनपी सिंह का कहना है कि क्षेत्र में हो रही बारिश से बंद सड़कें खोलने में दिक्कत आ रही है। संपर्क मार्गों पर वाहनों का संचालन बाधित न हो इसके लिए जेसीबी लगाई गई है।
ऊखीमठ में भीरी-परकंडी-मक्कूमठ मार्ग से मलबा हटाते समय पहाड़ी से गिरे बोल्डरों की चपेट में आने से तीन मजदूर घायल हो गए। स्थानीय लोगों ने 108 से उन्हें सीएचसी अगस्त्यमुनि में भर्ती कराया। एक मजदूर की हालत गंभीर होने पर उसे हायर सेंटर रेफर किया गया।
ककोला गांव के नीचे भूस्खलन के कारण नौ अगस्त से भीरी-परकंडी-मक्कूमठ मार्ग बंद पड़ा है। रविवार देर शाम को भूस्खलन प्रभावित जोन में 12 मजदूर मार्ग से मलबा हटाने में जुटे थे। इस दौरान पहाड़ी से बोल्डर सड़क पर आ गिरे। बोल्डर की चपेट में आने से तीन मजदूर घायल हो गए, जबकि अन्य मजदूरों ने भागकर अपनी जान बचाई।
स्थानीय लोगों ने घायलों को सीएचसी अगस्त्यमुनि भर्ती कराया। गंभीर रूप से घायल कुल बहादुर (33) को हायर सेंटर रेफर कर दिया गया जबकि अन्य दो घायलों को छुट्टी दे दी गई। पीएमजीएसवाई के अवर अभियंता हरीश भट्ट ने बताया कि प्रभावित क्षेत्र अति संवेदनशील बना है। घटना के बाद से मार्ग खोलने का काम रोक दिया गया है।
मुआवजे की मांग को लेकर दारमा घाटी से चीन सीमा को जाने वाली सड़क खोलने का काम ग्रामीणों ने रुकवा दिया है। सीपीडब्लूडी के अभियंता की शिकायत पर मंगलवार को धारचूला से राजस्व टीम ग्रामीणों से बातचीत के लिए दर गांव जाएगी।
सोबला से ढाकर तक जाने वाली 25 किमी सड़क पिछले दिनों हुई मूसलाधार बारिश के दौरान ध्वस्त हो गई थी। दर गांव के पास इस सड़क का लगभग 20 मीटर हिस्सा बह गया था। सीपीडब्लूडी ने पांच दिन पहले सड़क बनाने का काम शुरू किया, लेकिन ग्रामीणों ने सड़क से पहले मुआवजा देने की मांग को लेकर काम रुकवा दिया है।
ग्रामीणों के काम नहीं करने देने से सड़क नहीं बन पा रही है। इसके चलते सीमा की ओर जाने वाले सेना और अर्द्धसैनिक बलों के जवानों के साथ ही सीमांत के तमाम गांवों के लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सभी लोग पैदल जाने के लिए मजबूर हैं।
दारमा घाटी से सोमवार को धारचूला पहुंचे निर्माणदायी संस्था के एई कपिल कुमार ने बताया कि सड़क का काम पांच दिनों से बंद है। ग्रामीणों के विरोध करने के मामले में प्रशासन को पत्र दिया है। इधर, एसडीएम के पेशकार खीमानंद भट्ट ने बताया कि ग्रामीणों से बातचीत के लिए मंगलवार को सीपीडब्लूडी के अधिकारी के साथ राजस्व टीम को भेजा जाएगा।
चौदास घाटी को जाने वाली सड़क भी नारायण आश्रम से आगे और सोसा और सिरखा गांव से पहले बंद है। पीएमजीएसवाई के ईई किशन सिंह ने बताया कि दो तीन दिन में सड़क खुल जाएगी। दारमा घाटी से लौटे ग्रामीण गोविंद सिंह बोनाल और जीएस सेलाल ने बताया कि प्रशासन बंद सड़क खोलने के लिए कोई पहल नहीं कर रहा है।