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Uttarakhand Politics:...जब मिले दो पूर्व सीएम, कोश्यारी बोले- हरीश आप लेंगे विश्राम, हम भी करेंगे पूरा आराम

Thu, 23 Nov 2023 11:50 PM IST
अलका त्यागी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

इतिहास गवाह है कि दोनों को जब भी अवसर मिला, उन्होंने बयान दागे और पलटवार करने से भी नहीं चूके। एक-दूसरे पर तंज कसने में दोनों नेताओं ने कभी कोई कोर कसर नहीं छोड़ी।
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हरीश रावत और भगत सिंह कोश्यारी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तराखंड की सियासत के दो धुर विरोधी रहे पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी और हरीश रावत की मुलाकात सियासी हलकों में चर्चा का विषय बनी है। जवानी से लेकर वृद्धावस्था की दहलीज पर कदम रखने से पहले तक एक-दूसरे के खिलाफ बयानी तलवारें खींचने वाले ये दोनों दिग्गज एक दिन पहले कुछ अलग अंदाज मिले। राजनीति से जुदा उनका यह अंदाज सम्मान और आदर भाव का था।

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इतिहास गवाह है कि दोनों को जब भी अवसर मिला, उन्होंने बयान दागे और पलटवार करने से भी नहीं चूके। एक-दूसरे पर तंज कसने में दोनों नेताओं ने कभी कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। लेकिन वृद्धावस्था के जिस दौर से दोनों दिग्गज गुजर रहे हैं, उसने उन्हें एक-दूसरे की चिंता और परवाह करने की राह दिखाई।

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सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इन दो प्रमुख हस्तियों की मुलाकात की सुखद तस्वीर के अलग मायने हैं। अस्पताल में भर्ती हरीश की कुशलक्षेम जानने पहुंचे कोश्यारी यहां चुटकी लेने से नहीं चूके। हास-परिहास में बोले- मैंने तो विश्राम ले लिया है, अब आप भी आराम करो। रावत ने भी उसी सहज भाव में उत्तर दिया, मैंने भी आपको गुरु मान लिया है, आप विश्राम लेंगे तो हम भी आराम करेंगे।

बात को आगे बढ़ाते हुए हरीश बोले, उत्तराखंड की राजनीति के तीन स्कूलों में एक एनडी तिवारी, दूसरा आपका (कोश्यारी) और तीसरा मेरा (हरीश) है। आपने अपने कई शिष्यों को खूब आगे बढ़ाया है। मैं भी खुद को उसी में गिनता हूं। बात एनडी की चली तो कोश्यारी बोले, तिवारी जी देश के बड़े नेता थे। उनके पार्टी ही नहीं विपक्ष में भी खूब मित्र थे। लेकिन हेमवती नंदन बहुगुणा, केसी पंत और आप (हरीश) से उन्होंने कभी मित्रभाव नहीं रखा। ऐसा क्यों था, यह कभी समझ नहीं आया।

कोश्यारी से अपनी इस मुलाकात पर अमर उजाला से बातचीत में हरीश बोले, मैं उन्हें हमेशा भगत दा (बड़ा भाई) कहता हूं। भगत दा उत्तराखंड की राजनीति के महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं और हमेशा बने रहेंगे। वह उनके विचारों के नहीं, समर्पण के कायल हैं।
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