इसी वर्ष अगस्त माह में करीब 13 लाख रुपये की लागत से अपने घर की छत पर 245 स्क्वायर फीट का वाटरप्रुफ कमरा तैयार किया। इन चार महीनों में फूलों से केसर भी होने लगा है। नीरज बताते हैं कि उन्होंने यूट्यूब से केसर उत्पादन की जानकारी ली और करीब तीन दिन तक चंडीगढ़ में इसकी खेती का प्रशिक्षण लिया।
उसके बाद कश्मीर से करीब 100 किलोग्राम केसर का बीज खरीदा। उन्होंने बताया कि उद्यान विभाग से इसके लिए मदद मांगी, लेकिन विभाग ने असमर्थता जताई, जिसके बाद बैंक से 10 लाख रुपये का ऋण लेकर कारोबार शुरू किया। इस केसर को प्रमाणित करने के बाद बाजार में उपलब्ध कराया जाएगा। बता दें कि नीरज ने बीटेक और एमबीए की पढ़ाई की है। उनके पिता यदुनंदन भट्ट का अपना क्लीनिक है जबकि माता शिक्षिका हैं। नीरज आज युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं। संवाद
केसर उत्पादन की विधि
नीरज ने बताया कि ऐरोपोनिक्स विधि से केसर के बीज लकड़ी की ट्रे में रखे जाते हैं। इसके लिए कमरे का तापमान 21 से 5 डिग्री तक होना चाहिए। रात को कमरे का तापमान 5 डिग्री तक जरूरी होता है। एक फसल चार माह में तैयार होने लगती है और केसर फूल से प्राप्त किया जाता है।