जून से वेतन न मिलने समेत कई समस्याओं को लेकर रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तराखंड के बैनर तले रोडवेजकर्मियों ने मंगलवार को धरना दिया। चरणबद्घ आंदोलन के पहले चरण में धरने के जरिए रोडवेजकर्मियों ने आवाज बुलंद की। मांगों का जल्द समाधान न होने पर 28 अक्तूबर से प्रदेशव्यापी कार्यबहिष्कार की चेतावनी भी दी है।
मंगलवार को सुबह से देहरादून के ग्रामीण, पर्वतीय डिपो, रोडवेज वर्कशॉप, मंडलीय कार्यालय में संगठन से जुड़े सैकड़ों कर्मी धरने में शामिल रहे। धरने की कमान संभाल रहे प्रांतीय महामंत्री दिनेश चंद्र पंत ने कहा कि हर मुश्किल परिस्थितियों में रोडवेजकर्मी सरकार का साथ देता है, लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि निगम प्रबंधन ने कर्मियों को जून महीने से वेतन नहीं दिया है।
कर्मी लोन लेकर परिवार का गुजारा चला रहे है। प्रदेश अध्यक्ष विक्रम डंगवाल ने कहा कि निगम का शासन पर विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का 20 करोड़ रुपये बकाया है। अगर यह पैसा निगम को मिले तो कर्मियों को वेतन दिया जा सकता है, लेकिन निगम प्रबंधन अनदेखी कर रहा है। ऐसे में परिषद को आंदोलन को विवश होना पड़ा है। मंगलवार को प्रदेशभर की 34 स्थानों पर धरना आयोजित हुआ।
28 अक्तूबर से निगम मुख्यालय में अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार पूर्व निर्धारित है। धरने में प्रेम सिंह रावत, मेजपाल सिंह, अनुराग नौटियाल, राकेश पेटवाल, वरुण सबरवाल, शिव कुमार पांडे, नीरज मेंदीरता, संजय सोनकर व अन्य कई पदाधिकारी शामिल रहे।
आईएसबीटी में जमकर नारेबाजी
आईएसबीटी में परिषद की ग्रामीण डिपो शाखा द्वारा दिए धरने में प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई। Òवेतन दो-अभी दोÓ जैसे नारे लगाकर आवाज बुलंद की। इस दौरान शाखा अध्यक्ष अतुल पोखरियाल, मंत्री महेश कुमार, जेएनयूआरएम शाखा अध्यक्ष प्रवीण बडोनी, मंत्री अनुज पेटवाल, कुसुस भट्ट, गोदावरी नेगी, आनंद पाल, दिनेश सती, विक्रांत खत्री, संजय सोनकर, अखिल डोभाल शामिल रहे।
राजकीयकरण की मांग को 'आप' का समर्थन
पर्वतीय डिपो (निकट रेलवे स्टेशन) में चल रहे धरने में आम आदमी पार्टी (आप) की प्रदेश प्रवक्ता उमा सिसोदिया कार्यकर्ताओं के साथ पहुंची। उन्होंने रोडवेजकर्मियों की मांगों को जायज ठहराया। साथ ही आश्वासन दिया कि प्रदेश में आप की सरकार बनी तो परिवहन निगम का राजकीयकरण किया जाएगा।
ये हैं मुख्य मांगें
-17 मार्च 2020 की बैठक में बनी सहमति लागू हो।
-सेवानिवृत्त एवं मृत कर्मियों के आश्रितों को देयकों का भुगतान।
-नियमित, संविदा एवं विशेष श्रेणी कर्मियों को दीपावली से पहले न्यूनतम दो महीने का वेतन भुगतान।
-संविदा व विशेष श्रेणी को पूर्व की भांति प्रोत्साहन योजना व समान कार्य-समान वेतन का लाभ।
-कर्मियों को बकाया वेतन भुगतान, पदोन्नति आदि मांगें।