इधर, श्रीकेदारनाथ धाम के मुख्य पुजारी शिव शंकर लिंग ने कहा कि सनातन धर्म की परंपराओं का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। केदारनाथ मंदिर भगवान आशुतोष के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में एक है। ऐसे में इस दिव्य धाम का प्रतीकात्मक निर्माण संभव नहीं है। कहा कि जो लोग इस तरह का कृत्य कर रहे हैं, बाबा केदार उनकी बुद्धि को ठीक करें। धाम में प्रदर्शन व नारेबाजी करने वालों में कई यात्री भी शामिल थे।
इधर, केदारनाथ विधानसभा की पूर्व विधायक व भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष आशा नौटियाल का कहना है कि केदारनाथ मंदिर धाम दिल्ली ट्रस्ट द्वारा कराए जा रहे मंदिर निर्माण पर शीघ्र प्रतिबंध लगना चाहिए। विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम करोड़ों हिंदुओं की आस्था का प्रतीक है। बाबा केदार की यात्रा से प्रतिवर्ष केदारघाटी सहित देवभूमि उत्तराखंड के अन्य स्थानों के हजारों परिवारों की आजीविका को भी बल मिलता है। कहा कि केदारनाथ मंदिर का प्रतीकात्मक निर्माण किसी भी स्थिति में मंजूर नहीं है। यह सीधे-सीधे करोड़ों शिव भक्तों की आस्था के साथ खिलवाड़ है।
केदारनाथ प्रतीकात्मक मंदिर से सरकार का लेनादेना नहीं : पंवार
भाजपा के जिलाध्यक्ष महावीर पंवार ने कहा कि दिल्ली में श्रीकेदारनाथ धाम ट्रस्ट की ओर से बनाए जा रहे केदारनाथ मंदिर का विरोध उचित नहीं है। कहा कि मंदिर के निर्माण से उत्तराखंड सरकार को कोई लेनादेना नहीं है। जारी एक बयान में भाजपा के जिलाध्यक्ष ने कहा कि ट्रस्ट से जुड़े सभी लोग उत्तराखंड के हैं और देवभूमि की संस्कृति और परंपरा को आगे बढ़ाने के साथ सामाजिक व धार्मिक कार्यों को बढ़ावा दे रहे हैं। दिल्ली में बन रहा मंदिर सिर्फ प्रतीकात्मक है। कहा कि वर्ष 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत और तत्कालीन बीकेटीसी अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने मुंबई में बदरीनाथ मंदिर निर्माण का शिलान्यास किया था, लेकिन तब भाजपा ने विरोध नहीं किया था।