एनजीआरआई ने तीन तरीके से किया अध्ययन
एनजीआरई ने तीन तरीके से सर्वे को अंजाम दिया है। इसमें एक कृत्रिम भूकंप, दूसरा जमीन के भीतर बिजली का करंट पास करके और तीसरा जमीन के भीतर लेजर की किरणें भेजकर। इन तीनों सर्वे के नतीजे के आधार पर इन्होंने अपनी रिपोर्ट बनाई है।
50 सेमी चौड़ी और 35 मीटर गहरी दरारें उभरीं
जोशीमठ के भूगर्भीय सर्वेक्षण में सामने आया कि कठोर चट्टानों के ऊपर 35 मीटर से भी अधिक का मलबा जमा है, जो ग्लेशियर और लैंडस्लाइड से जमा हुआ है। इस मलबे में करीब 15 मीटर की मोटी परत कम कठोरता वाली मृदु मिट्टी से बनी है। दूसरी परत 20 मीटर पर है, जो अधिक कठोर और घनी है। इसके नीचे एक बार फिर से कम कठोरता वाली परत है। जोशीमठ में उत्पन्न दरारें धरातल पर करीब 50 सेंटीमीटर तक चौड़ी हैं। इनकी चौड़ाई अलग-अलग क्षेत्र में अलग-अलग है। जबकि गहराई 20 से 35 मीटर से भी अधिक है।