जल जीवन मिशन के तहत गांवों में हर घर नल से जल पहुंचाने में महज चार माह का समय बचा है। वहीं, 73 योजनाएं ऐसी हैं जिनके अभी तक टेंडर ही नहीं हुए। मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को इस संबंध में निर्देश दिए हैं।
दरअसल, राज्य में जल जीवन मिशन को यूं तो युद्ध स्तर पर पूरा करने की कवायद चल रही है लेकिन 73 परियोजनाओं के टेंडर ही अब तक जारी नहीं हुए हैं। अल्मोड़ा में 36, बागेश्वर में 12, नैनीताल में 10, देहरादून में सात, पिथौरागए़ में चार, चंपावत में दो, चमोली और टिहरी में एक-एक परियोजना का टेंडर नहीं हुआ है। इस पर मुख्य सचिव डॉ. एसएस संधू ने सख्त ऐतराज जताया है। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वह अपने स्तर से टेंडर जारी करने की कार्रवाई करें ताकि समय से काम पूरा किया जा सके।
949 कनेक्शन देने के लिए यूपीसीएल बनाएगा अलग सेल
मिशन की परियोजनाओं को चलाने के लिए 949 बिजली कनेक्शन किए जाने हैं, जिसके सापेक्ष 751 आवेदन आ चुके हैं। इनमें से 630 आवेदनों का शुल्क भी यूपीसीएल में जमा कराया जा चुका है। इसके बावजूद अभी तक केवल 232 बिजली कनेक्शन ही हुए हैं। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि यूपीसीएल विशेष प्रकोष्ठ बनाकर बिजली कनेक्शन देने का काम पूरा करे।
सभी जिलाधिकारियों को प्रगति बढ़ाने के निर्देश
यूपीसीएल के एमडी अनिल कुमार ने अक्तूबर तक सभी कनेक्शन देने की योजना बनाई है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई जल जीवन मिशन की बैठक में यह तथ्य भी आया कि अभी तक 3051 गांवों को हर घर नल से जल घोषित किया जा चुका है लेकिन इनमें से केवल 431 गांवों (14 प्रतिशत) का ही प्रमाणीकरण हो पाया है। मुख्य सचिव ने इस पर सभी जिलाधिकारियों को प्रगति बढ़ाने को कहा है।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि जल जीवन मिशन के कार्यों को 31 दिसंबर तक पूरा करने के लिए इसकी योजनाओं की दोबारा समीक्षा की जाए और इसमें आवश्यक संशोधन करते हुए निर्धारित समय पर कार्य पूरा करने के लिए पुनरीक्षित कार्ययोजना बनाएं।
जरूरत पड़ने पर सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी मौका
मुख्य सचिव का कहना है कि जल जीवन मिशन के सभी कार्य समय से कराए जाएं। इसके लिए निर्माण खंडों में स्टाफ बढ़ाने के साथ ही जरूरत पड़ने पर सेवानिवृत्त कर्मचारियों-अधिकारियों कुछ समय के लिए दोबारा नियुक्ति दी जाए।
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आईटीआई में मिलेगा पेयजल योजना संचालन का प्रशिक्षण
प्रदेशभर में जल जीवन मिशन से जो परियोजनाएं बनेंगी। उनके संचालन की जिम्मेदारी स्थानीय स्तर पर ग्रामीणों की समितियों को आईटीआई से प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके लिए पेयजल विभाग अब कौशल विकास विभाग के समन्वय शुरुआत करने जा रहा है।