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Uttarakhand: चार सालों में सदन के चार सदस्यों का निधन, तीन भाजपा और एक कांग्रेस नेता ने छोड़ी दुनिया

Wed, 26 Apr 2023 10:22 PM IST
अलका त्यागी संवाद न्यूज एजेंसी, हल्द्वानी

सार

मंत्री चंदन राम दास से पहले तत्कालीन वित्त मंत्री प्रकाश पंत, तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश और विधायक सुरेंद्र सिंह जीना का निधन हो गया था।
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चार साल में कुमाऊं के चार नेताओं का निधन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तराखंड में कुमाऊं मंडल की बात करें तो पिछले चार साल में चार ऐसे नेताओं का निधन हुआ है जो निधन के समय विधानसभा के सदस्य थे। बुधवार को परिवहन मंत्री और बागेश्वर विधायक चंदन राम दास इस दुनिया में नहीं रहे। इससे पहले तत्कालीन वित्त मंत्री प्रकाश पंत, तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश और विधायक सुरेंद्र सिंह जीना का निधन हो गया था। मंत्री दास की तरह ही डॉ. इंदिरा हृदयेश का निधन भी अचानक हुआ था।

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साल 2019 में प्रकाश पंत का हुआ था निधन

तत्कालीन कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत का निधन पांच जून 2019 को हुआ था। पिथौरागढ़ से विधायक रहे पंत का निधन अमेरिका में उपचार के दौरान हुआ था। वह कैंसर से पीड़ित थे। प्रकाश पंत भाजपा के प्रमुख नेताओं में से एक थे। मिलनसार और मृदभाषी स्वभाव के थे जिस समय उनका निधन हुआ वे वित्त मंत्री के तौर पर सरकार में शामिल थे।

सल्ट विधायक ने 50 साल की उम्र में छोड़ दी दुनिया

सल्ट से भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह जीना का निधन 12 नवंबर 2020 को 50 वर्ष की आयु में हुआ था। सल्ट सीट पर कांग्रेस के रंजीत रावत का दबदबा था। ऐसा माना जाता था कि इस सीट पर उनको चुनौती देना मुश्किल है। ऐसे में साल 2012 और 2017 के विधानसभा चुनाव में सुरेंद्र जीना ने उन्हें हराकर यहां भाजपा का झंडा फहराया। राजनीतिक गलियारों में कहा जाता है कि यदि सुरेंद्र जीना आज जीवित होते तो सरकार में अहम जिम्मेदारी निभा रहे होते। बहुत ही कम उम्र में उनका निधन हो गया था।

अचानक दुनिया को अलविदा कह गईं थीं डॉ. इंदिरा

जून 2021 में तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष और पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. इंदिरा हृदयेश का निधन हुआ था। निधन के समय वे दिल्ली में थीं। हल्द्वानी से तीन बार विधायक चुनी गईं। वह राज्य की प्रमुख नेताओं में एक थीं। वह विकास कार्यों के लिए जानी जाती हैं। कहा जाता है कि हल्द्वानी को नया स्वरूप देने में उनकी बड़ी भूमिका थी।
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वारिसों और रिश्तेदारों ने संभाली कमान

हाल फिलहाल में दिवंगत हुए विधायकों के निधन के बाद उनके वारिसों, सगे रिश्तेदारों को ही उनकी राजनीतिक विरासत संभालने का मौका मिला है। प्रकाश पंत के निधन के बाद उनकी पत्नी चंद्रा पंत को भाजपा ने पिथौरागढ़ से टिकट दिया। वह यहां से दो बार चुनाव जीत चुकीं हैं। सल्ट विधायक सुरेंद्र जीना के निधन के बाद खाली हुई सीट से उनके बड़े भाई महेश जीना दो बार विधायक चुने जा चुके हैं। डॉ. इंदिरा हृदयेश के बाद उनके बेटे सुमित हृदयेश हल्द्वानी से विधायक चुने गए हैं। अब देखना है कि चंदन राम दास के निधन के बाद भाजपा उनकी खाली सीट पर क्या फैसला लेती है।
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