राजजात कब होगी, वसंत पंचमी को होगी घोषणा
समिति ने कहा कि अब 2026 की राजजात की कोई अधिकारिक घोषणा नहीं थी। वसंत पंचमी को श्रीनंदा देवी राजजात की मनौती की जाएगी। यही नहीं मनौती तक के सभी कार्यक्रम पूर्ववत रहेंगे। सिर्फ राजजात के कार्यक्रम दिनपट्टा जारी नहीं होगा। वसंत पंचमी को राजकुंवरों की ओर से ज्योतिष गणना के बाद राजजात कब होगी इसकी घोषणा कर दी जाएगी।
समिति ने बैठक में ये प्रस्ताव किए पारित
कर्णप्रयाग में आयोजित श्रीनंदा देवी राजजात समिति की कोर कमेटी की बैठक में राजजात 2026 को स्थगित करते हुए 2027 के लिए प्रस्तावित किया गया। इसकी अधिकारिक घोषणा वसंत पंचमी के दिन होने वाली मनौती में करने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही कई प्रस्ताव पारित किए गए। समिति ने प्रशासनिक ढांचा एवं प्राधिकरण का गठन, तहसील स्तर पर उपजिलाधिकारी और जिला स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समितियों का गठन करते हुए मंदिर समितियों, हक-हकूकधारियों और जन-प्रतिनिधियों को शामिल करने, वित्तीय प्रावधान एवं बजट, बजट में श्री नंदादेवी राजजात मद का स्थायी सृजन करने, जिला योजना में अलग मद बनाने, संयुक्त मैप बनाने, बधाण की मां नंदादेवी के सभी पड़ावों को आधिकारिक पड़ाव घोषित करने के अलावा देवराडा व कुरुड़ को पर्यटन विभाग के मानचित्र में दर्ज करने, राजजात में शामिल होने वाली सभी डोलियों और यात्रियों के लिए सहायक मार्गों और पड़ावों पर ढांचागत सुविधाएं जुटाने के प्रस्ताव पारित किए गए।
प्रशासन ने समिति को दिया था यात्रा पर पुनर्विचार का पत्र
23 जनवरी को वसंत पंचमी को होने वाले मनौती महोत्सव में श्रीनंदा देवी राजजात 2026 का कार्यक्रम जारी होने से पहले ही प्रशासन के पत्र का समिति ने संज्ञान लिया। प्रशासन ने समिति को कई बिंदुओं को आधार बनाकर पुनर्विचार करने का पत्र सौंपा।
समिति को चमोली जिला प्रशासन ने पत्र भेजते हुए कहा कि पैदल महाकुंभ के रूप में होने वाली विश्व प्रसिद्ध श्रीनंदा देवी राजजात ऐतिहासिक तथा आध्यात्मिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। इस यात्रा का सातवीं या आठवीं सदी से यात्रा का आयोजन होता रहा है। इस यात्रा में चौसिंग्या मेंढा (चार सींगों वाला भेड़) यात्रा के पथ प्रदर्शक के रूप में चलता है। यात्रा मायके की छंतोली रिंगाल तथा ससुराल पक्ष की छंतौली भोजपत्र की ओर से निर्मित होती है। इसमें जनपद के अलावा कुमाऊं के देवी देवताओं के निशान-प्रतीक (भंकोर, शंख, त्रिशूल आदि) लेकर श्रद्धालु आते हैं। कहा गया कि यात्रा की तैयारियां शासन स्तर पर की जा रही हैं। बावजूद वर्ष 2025 में कई क्षेत्रों में भारी बारिश एवं बादल फटने की घटनाएं हुई हैं। इसमें देवाल, थराली एवं नंदानगर ब्लॉक मुख्य रूप से प्रभावित हुए हैं। यहां पुनर्निर्माण कार्य जारी हैं। यात्रा में श्रद्धालुओं की भारी संख्या और निर्जन क्षेत्र सहित आपदा को देखते हुए प्रशासन ने समिति से जनसुरक्षा के निमित्त अपेक्षित निर्णय लेने की बात कही। मलमास की अड़चन के साथ इस पत्र को समिति ने आधार बनाते हुए कहा कि जनसुरक्षा के तहत यह फैसला लिया गया है।