लॉकडाउन की बंदिशें आम आदमी को भले ही चुभ रही हों, लेकिन ये बंदिशें प्रकृति और पर्यावरण के लिए नया जीवन लेकर आई हैं।
परिंदे स्वच्छंद उड़ान भर रहे हैं। पेड़-पौधे झूम रहे हैं। चोपता, बनियाकुंड, तुंगनाथ, घाट, रमणी, वेदनी आदि बुग्यालों में भी हरी मखमली घास बिछ गई है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि मवेशियों का चुगान बंद हाने से इनकी मिट्टी की परत मजबूत हुई है। अच्छी घास निकल रही है। मानवीय हस्तक्षेप न होने का नतीजा प्रकृति और पर्यावरण के लिए शुभ रहा है।
बुग्यालों में लॉकडाउन की वजह से मानवीय हस्तक्षेप कम हो गया है। इससे दुर्लभ श्रेणी की औषधीय प्रजातियों की वृद्धि की उम्मीद है।
- विजयकांत पुरोहित, वैज्ञानिक, उच्च शिखरीय पादप शोध केंद्र, गढ़वाल विवि श्रीनगर