भूस्खलन की आवाज सुनकर आसपास मौजूद कर्मचारी भी वहां से भाग गए। भूस्खलन इतना जबरदस्त था कि एनएच के नीचे नंदप्रयाग-देवखाल मार्ग पर खड़े वाहन भी इसकी चपेट में आ गए। वहां पर कुछ लोग ट्रक से सीमेंट उतार रहे थे, मलबा गिरने की आवाज से वह भाग निकले और देखते ही देखते ट्रक और पास में खड़ी कार मलबे में दब गई।
वहीं एनएच के नीचे बने पर्यावरण मित्रों के तीन मकान भी जमींदोज हो गए, जबकि एक मकान को आंशिक नुकसान पहुंचा है। हालांकि पिछले दिनों हुए भूस्खलन को देखते हुए पहले ही मकान खाली कराकर लोगों को अन्यत्र शिफ्ट करा दिया गया था, जिससे जनहानि नहीं हुई, लेकिन मकान में रखा उनका सामान नष्ट हो गया।
वहीं एनएच के नीचे नंदप्रयाग-देवखाल मार्ग भी मलबे से बंद हो गया। नंदप्रयाग नगर पंचायत अध्यक्ष हिमानी वैष्णव ने कहा कि गनीमत रही की कोई जनहानि नहीं हुई। हाईवे और मार्ग बंद होने से दिक्कतें बढ़ गई हैं।
प्रत्यक्षदर्शी संजय पुरोहित और महेंद्र कफोला का कहना है कि वह नंदप्रयाग के पास एक होटल में चाय पी रहे थे। तभी अचानक तेजी से पत्थर और बोल्डर गिरने की आवाज आई। बाहर जाकर देखा तो धूल का गुबार था। काफी देर बाद जब धूल का गुबार छंटा तो देखा पहाड़ी से भारी भूस्खलन हुआ था।
जिस जगह बृहस्पतिवार को भूस्खलन हुआ उसी स्थान पर 31 जनवरी की रात को भी भूस्खलन हुआ था, जिससे एनएच करीब 14 घंटे तक बंद रहा। भूस्खलन से एक कार मलबे की चपेट में आ गई थी और चालक घायल हो गया था।
भूस्खलन से वाहन और भवनों को नुकसान हुआ है। हाईवे पर बड़े-बड़े बोल्डर आए हैं, जिसे हटाने और हाईवे खोलने में अभी काफी समय लगेगा। - नंद किशोर जोशी, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी।