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इंसानियत: बरसात की रात, कठिन राह, कराह और किलकारी...गर्भवती आरती के लिए आधी रात मसीहा बनकर पहुंचे नाजिम

Thu, 03 Aug 2023 09:45 PM IST
अलका त्यागी संवाद न्यूज एजेंसी, हल्द्वानी

सार

Haldwani News: इस कहानी में एक ऐसा पात्र भी जुड़ा जिसने तेज बारिश, घर पर इंतजार कर रहे अपने परिवार की परवाह किए बिना दंपती को समय पर अस्पताल पहुंचाकर सामाजिक मूल्यों को मजबूती दी है। ये दायित्व अमर उजाला के वरिष्ठ उपसंपादक नाजिम मिकरानी ने आगे बढ़कर निभाया।
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अमर उजाला के वरिष्ठ उपसंपादक नाजिम मिकरानी ने की गर्भवती महिला की मदद - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मंगलवार की रात जब हल्द्वानी के लोग सो रहे थे उसी दौरान रामपुर रोड पर एक पति प्रसव पीड़ा से कराह रही पत्नी को अस्पताल पहुंचाने की जद्दोजहद कर रहा था। बिना साधन, तेज बारिश और सुनसान सड़क पर बेबस परिवार ने पैदल ही महिला अस्पताल से करीब डेढ़ किमी दूर सुशीला तिवारी अस्पताल पहुंचने का फैसला कर लिया था। रामपुर रोड पर दंपती ने कुछ वाहन चालकों से मदद की गुहार भी लगाई, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। हालांकि इस कहानी का अंत सुखद रहा और जच्चा-बच्चा अस्पताल में स्वस्थ हैं।

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हां, इस कहानी में एक ऐसा पात्र भी जुड़ा जिसने तेज बारिश, घर पर इंतजार कर रहे अपने परिवार की परवाह किए बिना दंपती को समय पर अस्पताल पहुंचाकर सामाजिक मूल्यों को मजबूती दी है। ये दायित्व अमर उजाला के वरिष्ठ उपसंपादक नाजिम मिकरानी ने आगे बढ़कर निभाया। उन्होंने दंपती के दर्द को समझा और उन्हें बड़ी हमदर्दी से अपनी बाइक पर बैठाकर अस्पताल में दाखिला भी दिलाया। पीड़ित परिवार की परेशानी और पीड़ा में बिना संकोच शामिल होकर स्याह रात के बाद सुबह परिवार में नन्हीं खुशी की किलकारी से नाजिम के चेहरे पर सुकून है। नाजिम से ही जानें क्या हुआ बीती रात...

प्रसव पीड़ा से कराहती पति के साथ पैदल जा रही महिला को वरिष्ठ उपसंपादक नाजिम मिकरानी ने अस्पताल पहुंचाया। उन्होंने बताया कि रात के करीब सवा दो बजे ऑफिस से काम समाप्त कर घर के निकला तो बाहर तेज बारिश हो रही थी। इस बीच घर से भी जल्दी पहुंचने के फोन आ रहे थे। लिहाजा भीगते हुए ही मैंने घर निकलने का फैसला किया।

मैं सुशीला तिवारी अस्पताल के सामने से होते हुए जब मेडिकल कॉलेज तक पहुंचा तो सामने से एक दंपती आता दिखा। महिला दर्द से कराह रही थी और डगमगाकर चल रही थी, उसके साथ पति उसे सहारा देकर आगे बढ़ा रहा था। पहले तो मैं कुछ आगे बढ़ गया लेकिन अचानक मुझे लगा जरूर ये किसी परेशानी में हैं। मैंने बाइक वापस घुमाई और उनकी परेशानी जानी। पति प्रदीप बिष्ट से बातचीत में पता चला कि पत्नी आरती गर्भवती है।

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महिला अस्पताल ले गए थे, वहां भर्ती न करने पर एसटीएच जा रहे हैं। कोई साधन न मिलने पर पैदल ही सुशीला तिवारी के लिए चल पड़े हैं। बारिश से तरबतर पति-पत्नी की परेशानी को देख मैं यह भूल गया कि मैं भी भीग गया हूं और घर पर सब इंतजार कर रहे हैं। मैंने बिना समय गंवाए फैसला कर लिया और पति पत्नी को किसी तरह अपनी बाइक पर बैठाकर सुशीला तिवारी पहुंचाया। गर्भवती की हालत गंभीर देख कैज्युअल्टी में मौजूद डॉक्टर ने तत्काल गायनी वार्ड के लिए भेज दिया। गायनी वार्ड पहुंचे तो वहां भी डॉक्टर ने हाथों-हाथ लिया और इलाज शुरू हो गया। अस्पताल स्टाफ ने महिला को कपड़े भी उपलब्ध कराए।

कुछ देर रुकने के बाद जब मुझे इत्मिनान हो गया तो मैं अपना मोबाइल नंबर देकर घर लौट आया। पूरी रात जिज्ञासा रही... सुबह जब प्रदीप का फोन आया तो उन्होंने खुशखबरी दी कि सुबह पांच बजे नार्मल डिलीवरी हो गई और उनके घर नन्हीं कली आई है... तो आधी रात को अपने प्रोफशनल काम की जिम्मेदारी निभाने के बाद सामाजिक सरोकार वाली जिम्मेदारी का निर्वहन करने और एक परिवार की मदद से मुझे बेहद सुकून मिला।
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आरोप: महिला अस्पताल से रात डेढ़ बजे लौटाया

प्रदीप बिष्ट ने बताया कि वह एक निजी अस्पताल में कार्यरत हैं। पत्नी आरती का महिला अस्पताल से काफी समय से इलाज चल रहा था। मंगलवार दोपहर आरती को प्रसव पीड़ा हुई तो वह महिला अस्पताल गईं। चिकित्सा स्टाफ ने अभी समय है कहकर लौटा दिया। रात करीब 11:30 बजे बुखार के साथ ही पेट दर्द बढ़ने पर प्रदीप आरती को लेकर दोबारा महिला अस्पताल के इमरजेंसी में पहुंचे। यहां मौजूद चिकित्सा स्टाफ ने जांच कर हालत सीरियस बताते हुए एसटीएच जाने के लिए कह दिया। प्रदीप ने बताया कि बारिश का हवाला दिया गया मगर जवाब मिला कि नीचे (मुख्य गेट के पास) खड़े हो जाओ। चाहे 108 को कॉल करो या किसी अन्य को लेकिन यहां से जाओ। बताया कि तेज बारिश हो रही थी। सड़क पर आसपास कहीं ऑटो नहीं मिला। कई दोस्तों को फोन मिलाया लेकिन फोन नहीं उठा। परेशान होकर वे पैदल ही सुशीला तिवारी अस्पताल की ओर चल दिए। रामपुर रोड पहुंचने तक हिम्मत जवाब दे गई। आते-जाते कई वाहनों को रोकने के लिए हाथ बढ़ाया लेकिन कोई नहीं रुका। लग रहा था कि एसटीएच तक शायद ही पहुंच पाएं।  

महिला को रात ढाई बजे अस्पताल लाया गया था। उसकी हालत गंभीर थी, कपड़े भीग चुके थे। अस्पताल स्टाफ ने उसे कपड़े उपलब्ध कराए और तत्काल इलाज शुरू कर दिया। स्वास्थ्य कर्मी इसी तरह कार्य करते हैं। यही फर्ज भी है, जिसे निभा रहे हैं। इसे आगे भी जारी रखा जाएगा। इस समय जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।
-डॉ. अरुण जोशी, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज

मैंने जब अपने स्टाफ से पता किया तो बताया गया कि जांच करते समय गर्भवती दर्द से कराह रही थी और सहयोग नहीं कर रही थी। चिल्ला रही थी कि वह महिला अस्पताल में नहीं रहेगी। डॉक्टर के आने तक वह वहां से जा चुकी थी। बिना डॉक्टर के परामर्श के रेफर भी नहीं किया जाता है।
-उषा जंगपांगी, सीएमएस, महिला अस्पताल, हल्द्वानी।
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