आपदा में लापता लोगों में से अब तक 34 लोगों के शव अलग-अलग स्थानों से बरामद हो चुके हैं, जिसमें से नौ लोगों की शिनाख्त हो चुकी है। इनमें से छह उत्तराखंड के रहने वाले हैं। जिला प्रशासन की तरफ से शिनाख्त लोगों की सूची बृहस्पतिवार को जारी की गई। अन्य शवों की शिनाख्त की जा रही है। कई शवों के क्षति विक्षत होने के कारण भी शिनाख्त नहीं हो पा रही है।
इनकी हुई शिनाख्त
नाम पता
1- नरेंद्र लाल पुत्र एतवारी लाल ग्राम तपोवन जोशीमठ चमोली,
2- जीतेंद्र थापा पुत्र खेम बहादुर लच्छीवाला देहरादून,
3- दीपक कुमार पुत्र रमेश राम ग्राम भतेड़ा, बागेश्वर
4- बलवीर गड़िया पुत्र हयात सिंह ग्राम गाड़ी, चमोली
5- मनोज चौधरी पुत्र जसवंत चौधरी ग्राम बेनोली, चमोली
6- राहुल कुमार पुत्र भगवती प्रसाद ग्राम रावली महदूत, हरिद्वार
7- अवधेश पुत्र ललिता प्रसाद इच्छानगर मांझा, लखीमपुर उत्तर प्रदेश,
8- अजय शर्मा पुत्र बाबू लाल गणेशपुर, अलीगढ़ उत्तर प्रदेश
9- सूरज पुत्र बेचू लाल बाबूपुर, लखीमपुर खीरी उत्तर प्रदेश
नदी में पानी बढ़ने के बाद चमोली पुलिस नदी ने आस-पास के इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क किया जा रहा है। पुलिस ने लोगों से अनुरोध किया है कि वे सतर्क रहें और घबराएं नहीं।
ऋषिगंगा नदी में पानी बढ़ने के कारण अब सुरंग में भी पानी बढ़ने लगा है। राहत बचाव कार्य अभी भी रुका हुआ है।
उत्तराखंड डीजीपी अशोक कुमार ने बताया कि नदी में पानी के स्तर में वृद्धि के कारण बचाव अभियान अस्थायी रूप से रुका हुआ है। निचले इलाकों को खाली करने के आदेश दिए गए हैं।
बताया गया कि ऋषिगंगा नदी का जल स्तर दो गुना ज्यादा बढ़ गया है। अभी भी राहत बचाव कार्य रुका हुआ है।
लगातार ऋषिगंगा नदी में पानी का बहाव तेज हो रहा है। जिस वजह से मौके पर अफरातफरी का माहौल है। लाउड स्पीकर के द्वारा सभी लोगों को सतर्क किया जा रहा है।
सुरंग के पास नदी का बहाव तेज हो गया है। राहत बचाव क्षेत्र को खाली कराया गया है। सुंरग के पास करीब आधा किमी. का क्षेत्र खाली कराया गया है।
रैणी क्षेत्र में ऋषिगंगा नदी में पानी का बहाव बढ़ गया है। इस वजह से राहत बचाव कार्यों में लगी मशीनों और कर्मियों को सुरंग से वापस बुला लिया गया है। लोगाें को प्रभावित क्षेत्र से हटाया जा रहा है।
कई परिजन राज्यपाल बेबी रानी मौर्य के सामने फूट-फूट कर रोए। उन्हाेंने कहा कि सुरंग में फंसे हमारे लोगों को निकालने के लिए राहत बचाव कार्य धीमी गति से हो रहा है।
तपोवन में राज्यपाल के सम्मुख लापता लोगों के परिजनों ने सुरंग में बेहद धीमी गति से कार्य होने की शिकायत की। कहा कि चार दिनों से सिर्फ 100 मीटर तक ही मलबा हटाया गया है। मौके पर मौजूद अधिकारी गुमराह कर रहे हैं। राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने राहत, बचाव कार्य में तेजी लाने के निर्देश दे दिए गए हैं। मलबा हटाने के लिए नई मशीनें लगाई जाएंगी।
राज्य सरकार का कहना है कि चमोली में ग्लेशियर फटने से कुल 204 लापता लोगों में से 34 शव बरामद कर लिए गए हैं। जिनमें से 10 की पहचान हाे चुकी है।
उत्तराखंड की राज्यपाल बेबीरानी मौर्य और विधानसभा अध्यक्ष प्रेम चंद अग्रवाल भी आपदा प्रभावित क्षेत्र रैणी गांव में पहुंचे हैं। वह तपोवन में घटना स्थल का निरीक्षण कर रहे हैं।
रुका हुआ ड्रिलिंग का कार्य फिर से शुरू हो गया है। सुरंग में कुछ देर के यह कार्य रुका था। वहीं इसके साथ एक डोजर मलबा हटाने का कार्य कर रहा है।
तपोवन सुरंग में पांच मिटर तक ड्रिलिंग के बाद अब काम रोक दिया गया है। अंदर गैस बनने के कारण ड्रिलिंग करने में परेशानी हो रही है। जिस कारण फिलहाल काम रोक दिया गया है।
अभी तक आपदा में 170 लोग लापता हैं। 34 लोगों के शव बरामद कर लिए गए हैं, जिनमें से नौ लोगों की शिनाख्त हो चुकी है। नीचे सूची में पढ़ें मृतकों के नाम...
चमोली में तपोवन सुरंग के अंदर बचाव अभियान जारी है। आईटीबीपी की डीआईजी अपर्णा कुमार के मुताबिक ऐसी संभावना है कि सुरंग के अंदर कुछ और लोगों के फंसे होने की आशंका है। एनटीपीसी की टीम वर्टिकल ड्रिलिंग कर रही है।
आपदा के कारण चमोली जिले में कटे हुए गांवों में आईटीबीपी के जवान झूला पुल का निर्माण कर रहे हैं। इस पुल से प्रभावित गांवों में राशन वितरण किया जाएगा।
चमोली आपदा में बचाव अभियान के दौरान बरामद हो रहे शवों को शिनाख्त के लिए 72 घंटे के स्थान पर 96 घंटे सुरक्षित रखा जाएगा। दूसरे राज्यों के परिजन होने के कारण राज्य सरकार ने पहचानके लिए एक दिन बढ़ाया है। मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने इसकी पुष्टि की है।
उत्तराखंड डीजीपी अशोक कुमार ने बताया कि राहत बचाव कार्य जारी है। सुरंग झांकने के लिए ड्रिलिंग की जा रही है। अभी हम 6.5 मीटर तक पहुंचे हैं।
देर रात दो बजे सुरंग में 12 से 13 मीटर अंदर झांकने के लिए बचाव दल के द्वारा ड्रिलिंग शुरू की गई।