देश में धार्मिक महत्व की गंगा (भागीरथी) नदी के उद्गम स्थल वाली इस सीट का इतिहास बेहद रोचक रहा है। अविभाजित उत्तरप्रदेश में यह सीट उत्तरकाशी के नाम से जानी जाती थी। जो राज्य बनने के बाद गंगोत्री से अस्तित्व में आई। जिसमें जनपद के सीमांत विकासखंड भटवाड़ी सहित डुंडा तथा नगर पालिका क्षेत्र बाड़ाहाट (उत्तरकाशी) शामिल हैं। इस सीट पर जो भी पार्टी चुनाव जीतती है, उसकी सरकार बनती है। आजादी के बाद से करीब सात दशकों से चले आ रहे इस मिथक के चलते इस सीट को जीतने के लिए राजनीतिक दल अपनी पूरी ताकत झोंक देते हैं।
प्रमुख मुद्दे/समस्याएं:
-पर्यावरण बनाम विकास की लड़ाई में लटकी लोहारीनाग पाला परियोजना।
-कई दशकों से लंबित बस अड्डा व वाहन पार्किंग का निर्माण।
-भूमि स्वीकृति के बाद भी लंबित हाईटेक कूड़ा निस्तारण केंद्र का निर्माण।
-बदहाल स्वास्थ्य सुविधाएं और दिनोंदिन बढ़ती बेरोजगारी।
कुल मतदाता-86313
पुरूष-44344
महिला-41968
Uttarakhand Election 2022: चुनाव मैदान में ही नहीं, वर्चुअल दुनिया में भी फिसड्डी हैं ये पार्टियां
कौन-कौन, किस दल के विधायक सीट पर काबिज रहे
राज्य गठन से पूर्व
जयेंद्र सिंह बिष्ट, 1952 निर्दलीय।
जयेंद्र सिंह बिष्ट, 1957 कांग्रेस।
रामचंद्र उनियाल, 1958 कांग्रेस।
कृष्ण सिंह, 1962 कांग्रेस।
कृष्ण सिंह, 1967 कांग्रेस।
कृष्ण सिंह, 1969 कांग्रेस
बर्फिया लाल जुवांठा, 1977 जनता पार्टी।
बलदेव सिंह आर्य, 1980 कांग्रेस।
बलदेव सिंह आर्य, 1985 कांग्रेस।
बर्फिया लाल जुवांठा, 1989 जनता पार्टी।
ज्ञानचंद, 1991 भाजपा।
बलदेव सिंह आर्य, 1993 समाजवादी पार्टी।
ज्ञानचंद, 1996, भाजपा।
राज्य बनने के बाद
विजयपाल सजवाण, 2002 कांग्रेस।
गोपाल सिंह रावत, 2007 भाजपा।
विजयपाल सजवाण, 2012 कांग्रेस।
गोपाल सिंह रावत, 2017 भाजपा।
वादे पूरे/अधूरे
गंगोत्री विधायक के कार्यकाल में अच्छे काम हुए हैं। लेकिन उनके असमय निधन से कई काम अधूरे रह गए हैं। जिस भी पार्टी का प्रत्याशी चुनाव जीते, उसे यह काम आगे बढ़ाने चाहिए।
-जयदेव नौटियाल, व्यापारी
यह विधानसभा विकास की दौड़ में काफी पीछे है। आज भी कई गांवों में लोग बिजली, पानी, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। जन प्रतिनिधियों को इस ओर ध्यान देना चाहिए
-द्वारिका सेमवाल, सामाजिक कार्यकर्ता
इस सीट पर भाजपा-कांग्रेस को जनता ने बारी-बारी से मौका दिया है। इस बार विकास की सोच रखने वाले प्रत्याशी को मौका दिया जाना चाहिए।
-गोपेश्वर प्रसाद भट्ट, पूर्व सैनिक
बौन इंजीनियरिंग कॉलेज बंद होना दुर्भाग्यपूर्ण है। इंजीनियरिंग की तरफ युवाओं का रूझान घटना इसका कारण हो सकता है। भवन का सदुपयोग कर यहां विवि कैंपस खोला जाना चाहिए।
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सौरभ राणा, छात्र
पिछले पांच साल में विकास के कार्य ठप रहे हैं। जिसके कारण यह क्षेत्र बहुत पिछड़ गया है। जनता का आशीर्वाद मिलता है तो शिक्षा के क्षेत्र में मेडिकल व इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना एवं पर्यटन के क्षेत्र में भागीरथी नदी किनारे आस्था पथ के निर्माण का प्रयास किया जाएगा। साथ ही पट्टी स्तर पर खेल गतिवधियों को बढ़ावा देने के लिए मिनी स्टेडियम बनाए जायेंगे।
-विजयपाल सजवाण, पूर्व विधायक गंगोत्री