मोबाइल लोकेशन से खुला मामला
सीडीआर जांच के दौरान पुलिस को एक संदिग्ध नंबर मिला। जांच की गई तो यह नंबर आशीष निवासी वार्ड नंबर-दो, आदर्श विहार हरबर्टपुर के नाम पर पंजीकृत था। इस नंबर की लोकेशन घटनास्थल के आसपास के क्षेत्र में मिली। संदेह के आधार पर पुलिस आशीष कुमार को पूछताछ के लिए कोतवाली ले आई। सख्ती से पूछताछ की तो उसने पूरे मामले का पर्दाफाश कर दिया। बताया कि मुकेश, संतराम की पत्नी इंद्रा देवी का प्रेमी है और इन दोनों ने ही हत्या की साजिश रची।
12 फरवरी की शाम मुकेश और इंद्रा देवी ने आशीष को इस साजिश में शामिल किया और संतराम को आशीष के घर बुला लिया। यहां मुकेश ने संतराम के सिर पर हथोड़े से वार कर दिया। इससे संतराम की मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद मुकेश और आशीष, संतराम के शव को मैजिक वाहन से लेकर सहिया मार्ग पर जजरेड के पास पहुंचे और यहां खाई में डाल दिया।
हत्या को हादसा बताने के लिए यह आरोपी फिर से घर आए और संतराम की बाइक को जजरेड के पास ले जाकर उसे भी खाई में डाल दिया। बृहस्पतिवार को पुलिस ने इंद्रा देवी को उसके घर से और मुकेश निवासी तेलपुर थाना विकासनगर को बाईपास रोड त्रिशला धर्मशाला जाने वाले रास्ते से गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों की निशानदेही से हत्या में इस्तेमाल किया गया हथोड़ा भी बरामद कर लिया गया है।
साथ रहने के लिए हटाया संतराम को रास्ते से
मुकेश ने बताया कि उसकी पहचान इंद्रा देवी से आठ साल पहले हुई थी। इसके बाद वह फोन पर बात करने लगे और आपस में प्यार करने लगे। वह दोनों एक साथ रहना चाहते थे। लेकिन, संतराम के रहते यह संभव नहीं था। इसलिए दोनों ने संतराम को रास्ते से हटाने की योजना बनाई। इंस्पेक्टर शंकर सिंह ने बताया कि इंद्रा देवी की यह दूसरी शादी थी। पहली शादी से उसे तीन बच्चे हैं जो पहले पति के साथ ही रहते हैं।
बड़ा ठेका दिलाने के नाम पर बुलाया था संतराम को
पुलिस पूछताछ में मुकेश ने बताया कि वह हरबर्टपुर में कालसी रोड पर मैजिक वाहन चलाता है। पूर्व में वह मैजिक वाहन यूनियन का अध्यक्ष भी रह चुका है। आशीष यूनियन में एजेंट का कार्य करता है। इसलिए दोनों की काफी अच्छी दोस्ती है। घटना के दिन संतराम को आशीष के घर बड़ा ठेका दिलाने के नाम पर बुलाया था।