उत्तराखंड विधानसभा सत्र का तीसरा दिन।्
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विधानसभा में कार्यस्थगन प्रस्ताव के तहत भ्रष्टाचार का मुद्दे पर पक्ष और विपक्ष में वार-पलटवार हुआ। विपक्ष ने भ्रष्टाचार के मामलों की जांच के लोकायुक्त की मांग उठाई। संसदीय कार्यमंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने विपक्ष के सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि अनियतिमतता के मामले जहां भी सामने आए, सरकार ने उसमें पूरी सख्ती के साथ कार्रवाई की। पारदर्शी तरीके से जांच की गई। यदि विपक्ष के पास कोई शिकायत है तो वह जांच एजेंसियों के पास जा सकती है।
सदन में बुधवार की कार्यवाही की शुरुआत में ही विपक्ष भ्रष्टाचार के मुद्दे नियम 310 के तहत चर्चा कराने पर अड़ गया। स्पीकर ने विपक्ष की सूचना को नियम 58 में सुनने का भरोसा दिया। इसके बाद भोजनावकाश के बाद नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और विधायक प्रीतम सिंह समेत विपक्षी सदस्यों ने बारी-बारी से भ्रष्टाचार के मामलों को उठाया। वन विभाग, उद्यान, खनन, आबकारी समेत कई अन्य विभागों में भ्रष्टाचार के मामलों का जिक्र किया और सरकार पर ऐसे मामलों में संरक्षण देने का आरोप लगाया। विपक्ष की मांग थी कि राज्य में एक मजबूत लोकायुक्त बनाए जाने की जरूरत है।
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संसदीय कार्यमंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने विपक्ष के उठाए सवालों और आरोपों का सिलसिलेवार जवाब दिया। उन्होंने भ्रष्टाचार के मामलों में सरंक्षण देने को आरोपों को खारिज किया। उन्होंने दावा किया सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर चल रही है। जहां भ्रष्टाचार या अनियमितताओं के मामले सामने आए, वहां बेहद कठोरता के साथ कार्रवाई हुई। जरूरत पड़ी तो कानून को बहुत कठोर बनाया गया। नकल विरोधी कानून इसकी नजीर है। उन्होंने कहा कि सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति का ही नतीजा है कि पिछले एक साल में 1800 अवैध खनन व भंडारण के मामले पकड़े गए। इनसे 15 करोड़ की वसूली की गई। वनों को क्षति पहुंचाने के मामले में कार्रवाई की गई।